क्यूबा-अमेरिका रिश्तों में फिर बढ़ा तनाव, ईंधन संकट बना बड़ा कारण
क्यूबा-अमेरिका के बीच फिर बढ़ी तनातनी तेल और बिजली संकट ने बढ़ाई मुश्किलें आम जनता पर पड़ रहा सबसे ज्यादा असर

अमेरिका और क्यूबा के बीच एक बार फिर रिश्तों में तल्खी बढ़ती नजर आ रही है। ताजा विवाद हवाना स्थित अमेरिकी दूतावास से जुड़ा है, जहां क्यूबा सरकार ने जनरेटर के लिए डीजल इम्पोर्ट करने की इजाजत देने से साफ इनकार कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका पहले से ही क्यूबा पर ईंधन को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि अमेरिकी विदेश विभाग दूतावास में कर्मचारियों की संख्या घटाने पर विचार कर रहा है।
तेल को लेकर बढ़ी खींचतान
क्यूबा का ऊर्जा संकट कोई नया नहीं है, लेकिन हाल के महीनों में यह और गहरा गया है। अमेरिका की सख्ती के चलते वेनेजुएला से मिलने वाली तेल सप्लाई प्रभावित हुई है, जो क्यूबा के लिए बेहद अहम थी। इतना ही नहीं, अमेरिका ने उन देशों पर भी दबाव बनाया है जो क्यूबा को तेल बेचते हैं और टैरिफ जैसी चेतावनियां भी दी हैं। इससे क्यूबा की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
आम जनता पर पड़ रहा सीधा असर
इस तनातनी का सबसे ज्यादा असर क्यूबा की आम जनता झेल रही है। देश में बिजली संकट गहरा गया है, जिसके चलते खाने-पीने की चीजें खराब हो रही हैं। अस्पतालों में सर्जरी टालनी पड़ रही हैं और यूनिवर्सिटी में क्लासेस भी कम कर दी गई हैं। हालांकि, क्यूबा सरकार गैस, सोलर एनर्जी और घरेलू तेल के जरिए बिजली उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रही है, लेकिन यह जरूरत के मुकाबले काफी नहीं है।
सियासी दबाव भी बना हुआ है
अमेरिका सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक मोर्चे पर भी क्यूबा पर दबाव बनाए हुए है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति साफ है—क्यूबा में राजनीतिक सुधार और सियासी कैदियों की रिहाई के बिना किसी भी तरह की राहत संभव नहीं है। ऐसे में दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की फिलहाल उम्मीद कम ही नजर आ रही है।



