मिडिल ईस्ट युद्ध: अब 15 देश सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल
मिडिल ईस्ट में जंग विकराल, अब 15 देश सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल। ईरान, हिजबुल्लाह, अमेरिका और इजरायल के हमले और जवाबी कार्रवाई जारी। अमेरिकी गठबंधन की गोला-बारूद की कमी, कूटनीति और भारत पर बढ़ता दबाव।

Iran crisis: मिडिल ईस्ट और पश्चिम एशिया में जंग के हालात और विकराल हो गए हैं। ईरान ने ब्रिटेन और फ्रांस को भी जंग में घेर लिया है, और हिजबुल्लाह की भी एंट्री हो चुकी है। अब जंग में लगभग 15 देश सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हो चुके हैं।
हिजबुल्लाह और लेबनान की मिसाइलों का तांडव
लेबनान से लगातार रॉकेट और मिसाइलें इजरायल पर गिर रही हैं। हिजबुल्लाह के पास लगभग 40,000 मिसाइलें हैं, जो किसी भी समय बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकती हैं। इजरायल को लगातार मिसाइलों से झेलना पड़ रहा है, जिससे क्षेत्रीय तनाव चरम पर पहुंच गया है।
ईरान का सीधा हमला
ईरान ने साइप्रस में ब्रिटिश एयरबेस और अबुधाबी में फ्रेंच एयरबेस पर हमला किया। इसके अलावा, रात करीब 1 बजे उसने 850 मील दूर खड़े अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन पर 4 क्रूज़ मिसाइलें दागीं। बाद में अमेरिकी एयरक्राफ्ट करियर दक्षिण–पूर्व अरब सागर में छिप गया।
अमेरिकी और इजरायली जवाबी कार्रवाई
अमेरिका ने मिसिसिपी से 4 B2 बॉम्बर भेजे, जो 36 घंटे नॉन-स्टॉप उड़ान भरकर ईरान में 200 पाउंड के बम गिरा चुके हैं। इजरायल पर भी रात भर ईरानी मिसाइलें गिरती रही, साथ ही दुबई और बहरीन भी निशाने पर रहे।
ट्रंप और अमेरिकी प्रतिक्रिया
पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्ध मार्च के अंत तक खिंचने की आशंका जताई है। उनका कहना है कि इस लड़ाई में अमेरिकियों की जान चली जाए तो भी कोई गम नहीं। ईरान ने दावा किया कि उसने 500 अमेरिकी मारे हैं, जबकि पेंटागन ने केवल 3 जवानों की मौत स्वीकार की है।
ईरान की मिसाइल और परमाणु तैयारी
ईरान के पास मार्च तक फूंकने के लिए ढेरों मिसाइलें हैं, और वह एटम बम बनाने की भी क्षमता रखता है, जो पहले खामेनेई के समय नहीं हो सका। इसके बाद हाइपरसोनिक हथियारों का इस्तेमाल युद्ध के अंतिम चरण में संभव है।
अमेरिकी गठबंधन और कूटनीति
अमेरिकी गठबंधन अब ईरानी मिसाइल बैटरियों को खत्म करने पर उतारू है। वहीं, पिछले दरवाजे से कूटनीतिक बातचीत भी शुरू हो चुकी है। वाशिंगटन ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर से बातचीत की दिलचस्पी दिखाई है, लेकिन उनका हिजबुल्लाह के साथ करीबी रिश्ता इसे कठिन बना रहा है।
भारत और वैश्विक सबक
ईरान में सत्ता बदलने की अमेरिकी योजना नाकाम रही, जिससे उसकी ईस्ट पॉलिसी रूस और चीन की सहयोगी भूमिका के बावजूद खोखली दिख रही है। भारत के लिए यह सबक है कि जो करना है, खुद को ही करना होगा।
बढ़ता दबाव
जितने ज्यादा अमेरिकी ताबूत लौटेंगे, ट्रंप पर उतना दबाव बढ़ेगा। उनकी रेटिंग अब 38% पर आ गई है। नेतन्याहू और मोदी पर भी दबाव बढ़ा है; मोदी ने खामेनेई की शहादत पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। हॉर्मूज के 25 साल बाद बंद होने से बाजारों में भारी अस्थिरता पैदा हो सकती है।



