इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा मामला: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मांगी अग्रिम जमानत
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दी। झूंसी थाने में BNS और POCSO की कई गंभीर धाराओं में FIR दर्ज। 20 साल से उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान, जल्द हो सकती है सुनवाई।

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न का मामला अब इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंच गया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से अग्रिम जमानत (एंटिसिपेटरी बेल) की अर्जी दाखिल की गई है। यह याचिका अधिवक्ता राजर्षि गुप्ता, सुधांशु कुमार और श्री प्रकाश के माध्यम से दाखिल की गई है। माना जा रहा है कि कोर्ट इस पर जल्द सुनवाई कर सकता है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने जिला अदालत में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) के तहत अर्जी दाखिल की। इस अर्जी में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर गंभीर आरोप लगाए गए। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एडीजे (रेप एंड POCSO स्पेशल कोर्ट) विनोद कुमार चौरसिया ने झूंसी थाने की पुलिस को तुरंत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू करने का आदेश दिया।
किन धाराओं में दर्ज हुई FIR?
अदालत के आदेश के बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी और 2-3 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(3) और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) की धारा 5L, 6, 3, 4(2), 16 और 17 के तहत दर्ज की गई है।पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और हर पहलू को ध्यान में रखते हुए पड़ताल की जा रही है।
क्या हो सकती है सजा?
इन धाराओं के तहत दोष सिद्ध होने पर 20 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। कानूनी जानकारों का मानना है कि इतने गंभीर आरोपों में अंतरिम जमानत मिलना आसान नहीं होता। मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है और आगे की कार्रवाई कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगी।



