महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी केस में ED की बड़ी कार्रवाई, 21.45 करोड़ की संपत्ति जब्त

महादेव ऑनलाइन बुक केस में ED का शिकंजा और कसा भारत–दुबई में 21.45 करोड़ की चल-अचल संपत्ति जब्त सट्टेबाजी सिंडिकेट के कई बड़े नाम जांच के घेरे में

Enforcement Directorate: महादेव ऑनलाइन बुक (MOB) से जुड़े अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ा शिकंजा कसा है। ईडी के रायपुर जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत कार्रवाई करते हुए कुल 21.45 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां जब्त की हैं। जब्त की गई संपत्तियों में 98.55 लाख रुपये की चल संपत्ति और 27 अचल संपत्तियां शामिल हैं। इनमें भारत और दुबई में स्थित आवासीय मकान, कमर्शियल दुकानें, कृषि भूमि और लग्जरी अपार्टमेंट शामिल हैं, जिनकी कुल अनुमानित कीमत 20.46 करोड़ रुपये बताई गई है।

 

किन-किन आरोपियों की संपत्ति जब्त हुई?

ईडी के मुताबिक, जिन आरोपियों की संपत्तियां अटैच की गई हैं, उनमें कई बड़े नाम शामिल हैं: रवि उप्पल, महादेव ऑनलाइन बुक का मुख्य प्रमोटर बताया जा रहा है, जो फिलहाल फरार है। दुबई के एट्रिया रा इलाके में स्थित करीब 6.75 करोड़ रुपये की विदेशी संपत्ति को अटैच किया गया है। रजत कुमार सिंह: सौरभ चंद्राकर का करीबी सहयोगी रहा रजत कई पैनल्स का संचालन करता था। उसने 15 से 20 करोड़ रुपये की अपराध की कमाई (POC) अर्जित की। भिलाई और दुबई की संपत्तियां जब्त की गई हैं। सौरभ आहूजा और विशाल रमनी: दोनों साझेदारों ने करीब 100 पैनल्स संचालित किए और लगभग 30 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की। दुर्ग और भिलाई में स्थित संपत्तियों को अटैच किया गया है।

 

विनय कुमार और हनी सिंह

इन दोनों ने छह पैनल्स चलाए और सट्टेबाजी ऐप्स के फर्जी प्रचार में शामिल रहे। प्रत्येक ने करीब 3.5 करोड़ रुपये की कमाई की। जयपुर और नई दिल्ली के मकानों के साथ-साथ महिंद्रा थार और टोयोटा फॉर्च्यूनर जैसी लग्जरी गाड़ियां भी जब्त की गई हैं। लकी गोयल: टेलीग्राम के जरिए प्रचार में सक्रिय रहा लकी गोयल ने करीब 2.55 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की। राजस्थान में स्थित कई दुकानें और प्लॉट अटैच किए गए हैं।राजा गुप्ता: दुबई से ऑपरेट करने वाला राजा गुप्ता कम से कम 10 पैनल्स संभालता था। रायपुर में स्थित एक अचल संपत्ति को भी अटैचमेंट में शामिल किया गया है।

 

कैसे चलता था पूरा सट्टेबाजी नेटवर्क?

ईडी ने यह जांच छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज कई FIR के आधार पर शुरू की थी। जांच में सामने आया कि यह एक संगठित अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी सिंडिकेट था, जो Tiger Exchange, Gold365 और Laser247 जैसे डोमेन के जरिए अवैध सट्टेबाजी सेवाएं दे रहा था। यह पूरा नेटवर्क फ्रेंचाइजी मॉडल पर काम करता था, जिसमें अलग-अलग सहयोगी “पैनल” या “ब्रांच” के जरिए सट्टा संचालित करते थे, जबकि मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल दुबई से पूरे ऑपरेशन को कंट्रोल कर रहे थे।

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