लैंड फॉर जॉब घोटाला: लालू यादव परिवार के खिलाफ आरोप तय, ट्रायल शुरू होने का रास्ता साफ
लैंड फॉर जॉब घोटाले में लालू यादव परिवार पर कानूनी शिकंजा और कसा राउस एवेन्यू कोर्ट ने कहा ट्रायल के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद अब नियमित सुनवाई में सीबीआई पेश करेगी गवाह और दस्तावेज़

Lalu yadav: लैंड फॉर जॉब घोटाले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के परिवार को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की राउस एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में लालू यादव समेत 40 से ज्यादा आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि मामले में ट्रायल चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। अब इस केस में नियमित सुनवाई शुरू होगी और सीबीआई अपने गवाह और सबूत पेश करेगी। अदालत ने लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए हैं। कोर्ट ने लालू यादव पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही उन पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं में भी केस चलेगा। वहीं परिवार के अन्य सदस्यों पर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप तय किए गए हैं।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में आरोप बेहद गंभीर हैं। कोर्ट के मुताबिक, शुरुआती तौर पर यह साफ संकेत मिलते हैं कि आरोपियों के बीच आपराधिक साजिश थी और पूरा मामला एक संगठित आपराधिक नेटवर्क की तरह संचालित किया गया। इसी वजह से मामले की विस्तृत सुनवाई जरूरी है।
सीबीआई का दावा
सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया कि इस केस में कुल 103 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी, जिनमें से अब तक पांच आरोपियों की मौत हो चुकी है। जांच एजेंसी का आरोप है कि लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले जमीन ली गई और यह जमीन लालू परिवार या उनके करीबी लोगों के नाम पर ट्रांसफर कराई गई। हालांकि सभी आरोपियों ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है।
क्या है जमीन के बदले नौकरी घोटाला?
सीबीआई के मुताबिक यह मामला साल 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र (जबलपुर जोन) में ग्रुप-डी की नौकरियां दी गईं और बदले में उम्मीदवारों या उनके परिवार के सदस्यों से जमीन ली गई। यह जमीन बाजार कीमत से काफी कम दाम पर या गिफ्ट के तौर पर ली गई। एजेंसियों का कहना है कि कई मामलों में जमीनें मार्केट रेट के एक-चौथाई या एक-पांचवें हिस्से की कीमत पर ली गईं। जांच में सामने आया है कि करीब एक लाख स्क्वायर फीट जमीन सिर्फ 26 लाख रुपये में ली गई, जबकि इसकी सरकारी कीमत 4.39 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई। सीबीआई और ईडी के मुताबिक पटना और आसपास की कई कीमती जमीनें राबड़ी देवी, उनके बच्चों या बाद में उनके नियंत्रण वाली कंपनियों के नाम पर ट्रांसफर की गईं। एजेंसियों का दावा है कि जिन लोगों ने जमीन दी, उनके रिश्तेदारों को कुछ ही समय बाद रेलवे में नौकरी मिल गई।
जांच एजेंसियों की अहम बातें
जांच में यह भी सामने आया है कि ज्यादातर जमीनें सीधे या परोक्ष रूप से राबड़ी देवी से जुड़ी पाई गईं, जिन्हें मनी लॉन्ड्रिंग केस में अपराध से अर्जित संपत्ति माना गया है। इसके अलावा AK Infosystems नाम की एक कंपनी, जिसके पास कीमती जमीन थी, उसके शेयर बेहद कम कीमत पर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के नाम ट्रांसफर किए गए, ताकि असली मालिकाना छुपाया जा सके। इस मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी, जिसमें सीबीआई अपने गवाहों और सबूतों को अदालत के सामने पेश करेगी।



