साकेत कोर्ट से कूदकर कर्मचारी ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में बताया काम का दबाव
दिल्ली के साकेत कोर्ट परिसर में दर्दनाक घटना सामने आई। दिव्यांग कर्मचारी ने इमारत से कूदकर जान दी। सुसाइड नोट में काम के दबाव और मानसिक तनाव का जिक्र।

दिल्ली के साकेत कोर्ट परिसर से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। कोर्ट की इमारत से कूदकर एक कर्मचारी ने आत्महत्या कर ली। मृतक साकेत कोर्ट में ही कार्यरत था और दिव्यांग बताया जा रहा है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। पुलिस को मृतक के पास से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें उसने अपने इस कदम की वजह साफ-साफ लिखी है। हालांकि, इस मामले को लेकर साकेत कोर्ट प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
“विकलांग हूं, यह नौकरी मेरे लिए बहुत कठिन है”
सुसाइड नोट में मृतक ने लिखा है कि वह ऑफिस के काम के दबाव के चलते आत्महत्या कर रहा है और इसके लिए किसी को जिम्मेदार न ठहराया जाए। उसने बताया कि जब से वह अहल्मद बना है, तभी से उसके मन में आत्महत्या के विचार आने लगे थे।नोट में लिखा गया है कि वह 60 प्रतिशत दिव्यांग है और मौजूदा नौकरी उसके लिए बेहद कठिन साबित हो रही थी। उसने मानसिक दबाव से बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका।
“नींद नहीं आती, लगातार तनाव में रहता हूं”
मृतक ने सुसाइड नोट में यह भी लिखा कि उसे कई दिनों से नींद नहीं आ रही थी और वह लगातार तनाव और सोच में डूबा रहता था। उसने यह भी जिक्र किया कि जल्दी रिटायरमेंट लेने की स्थिति में भी उसे पेंशन और बचत 60 साल की उम्र में ही मिलती, जिससे वह खुद को असहाय महसूस कर रहा था।उसने हाई कोर्ट से अपील की कि भविष्य में दिव्यांग कर्मचारियों के प्रति नरम और संवेदनशील रवैया अपनाया जाए, ताकि कोई और इस तरह के कष्ट से न गुजरे।
कर्मचारियों में आक्रोश, धरना प्रदर्शन
इस घटना के बाद साकेत कोर्ट के कर्मचारियों में भारी नाराज़गी देखी गई। कर्मचारियों ने कोर्ट परिसर में धरना-प्रदर्शन किया और काम के दबाव तथा व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन से सुधार की मांग की। वहीं, साकेत कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है।



