ट्रंप की 500% टैरिफ चेतावनी से शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स 700 अंक टूटा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने की चेतावनी का असर अब वैश्विक बाजारों में साफ दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 0.4 फीसदी बढ़कर 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई।

Stock Market: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने की चेतावनी का असर अब वैश्विक बाजारों में साफ दिखने लगा है। इसी दबाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 8 जनवरी को लगातार चौथे दिन बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 700 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी फिसलकर 25,900 के नीचे आ गया। बाजार पर विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, कमजोर वैश्विक संकेत और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता का असर साफ नजर आया। शेयर बाजार की कमजोरी के साथ-साथ आज सोने और चांदी की कीमतों में भी तेज गिरावट देखने को मिली। दोपहर करीब 12:10 बजे बीएसई सेंसेक्स 713 अंक गिरकर 84,247 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 251 अंक टूटकर 25,889 पर पहुंच गया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में रहे, जिसमें मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में नजर आए।

 

शेयर बाजार गिरने के बड़े कारण

1. ट्रंप की 500% टैरिफ चेतावनी: डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे प्रस्तावित बिल का समर्थन किया है, जिसमें रूस से व्यापार करने वाले देशों पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने की बात कही गई है। इससे भारत और चीन जैसे देशों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इस खबर के बाद एक्सपोर्ट से जुड़ी कंपनियों, खासकर टेक्सटाइल और सीफूड सेक्टर में तेज बिकवाली देखने को मिली। 2. विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली: शेयर बाजार पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी निवेशकों की ओर से बना हुआ है। बुधवार को एफआईआई ने करीब 1,527 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। जनवरी में अब तक विदेशी निवेशक लगभग 4,650 करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं।

 

Stock Market: 3. कमजोर वैश्विक बाजार

वैश्विक संकेत भी भारतीय बाजार के पक्ष में नहीं रहे। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। वहीं अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली, जिससे निवेशकों का सेंटीमेंट प्रभावित हुआ। 4. भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर असमंजस: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते में हो रही देरी से निवेशक सतर्क नजर आए। ट्रंप की ओर से रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर अतिरिक्त टैरिफ की चेतावनी पहले से ही बाजार की चिंता बढ़ा रही है। कई भारतीय उत्पादों पर पहले ही 50 फीसदी तक टैरिफ लगाया जा चुका है।

 

5. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

Stock Market: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 0.4 फीसदी बढ़कर 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई। भारत अपनी अधिकांश तेल जरूरतें आयात करता है, ऐसे में कच्चे तेल की महंगाई से महंगाई और चालू खाते के घाटे की चिंता बढ़ जाती है।

 

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