यूपी में भी लागू हुआ ‘बिहार मॉडल’ SIR? ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होते ही भड़का सियासी संग्राम
यूपी में SIR की ड्राफ्ट लिस्ट जारी होते ही विपक्ष ने चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल खड़े किए मुस्लिम बहुल जिलों में 20 फीसदी तक वोटरों के नाम कटने से सियासी पारा हाई सपा का दावा – PDA वर्ग का एक भी वोट नहीं छूटने दिया जाएगा

Uttar Pradesh: बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कराए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर उठा विवाद अभी पूरी तरह थमा भी नहीं था कि अब वही ‘बिहार मॉडल’ उत्तर प्रदेश में लागू किए जाने के आरोप लगने लगे हैं। यूपी में SIR की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होते ही विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष का आरोप है कि जिस फॉर्मूले पर बिहार में अल्पसंख्यक वोटरों के नाम बड़े पैमाने पर काटे गए थे, वही प्रयोग अब उत्तर प्रदेश में दोहराया गया है। ड्राफ्ट लिस्ट के आंकड़े सामने आते ही सियासी पारा हाई हो गया है, खासतौर पर मुस्लिम बहुल इलाकों में भारी संख्या में वोटरों के नाम कटने को लेकर नया राजनीतिक संग्राम शुरू हो गया है।
बिहार में SIR बना था बड़ा मुद्दा
दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग ने SIR कराने का फैसला लिया था और इसे महज एक महीने में पूरा करने के निर्देश दिए गए थे। इस जल्दबाजी को लेकर आरजेडी, कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने आशंका जताई थी कि SIR की आड़ में अल्पसंख्यकों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे। जब बिहार में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी हुई तो करीब 69 लाख वोटरों के नाम कटने की खबर सामने आई। इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में विपक्ष को करारी हार का सामना करना पड़ा, जिससे SIR को लेकर उठे सवाल और तेज हो गए।
यूपी में भी ‘बिहार फॉर्मूला’ अपनाने का आरोप
अब वही विवाद उत्तर प्रदेश में भी खड़ा हो गया है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंगलवार, 6 जनवरी को निर्वाचन आयोग ने यूपी की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी कर दी। ड्राफ्ट लिस्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में SIR के बाद 2.89 करोड़ वोटरों के नाम काटे गए हैं, जो कुल मतदाताओं का करीब 18 फीसदी है। SIR से पहले प्रदेश में 15 करोड़ 44 लाख मतदाता थे, जो अब घटकर 12 करोड़ 55 लाख रह गए हैं। ड्राफ्ट लिस्ट सामने आते ही विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि मुस्लिम बहुल जिलों में जानबूझकर ज्यादा कटौती की गई है। सबसे ज्यादा वोटरों के नाम राजधानी लखनऊ में हटाए जाने की बात सामने आई है।
‘PDA का एक भी वोट नहीं छूटने देगी सपा’
समाजवादी पार्टी के नेता फखरुल हसन चांद ने बड़ी संख्या में वोटरों के नाम कटने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा से PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) वर्ग के अधिकारों की रक्षा करती आई है और आगे भी करती रहेगी। फखरुल हसन चांद ने साफ कहा कि पार्टी पूरी तरह सतर्क है और किसी भी हाल में PDA वर्ग का एक भी वोट छूटने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने चुनाव आयोग से वोटर लिस्ट की प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरतने की मांग की और वोटर आईडी को आधार से लिंक करने का सुझाव भी दिया।
लखनऊ में रिकॉर्ड कटौती
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में SIR के बाद 30.05 फीसदी वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं। पहले लखनऊ में 39.94 लाख मतदाता थे, जो अब घटकर 27.94 लाख रह गए हैं। यानी करीब 12 लाख वोटरों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हो गए हैं। गाजियाबाद इस मामले में दूसरे नंबर पर है, जहां 28.83 फीसदी वोटर्स के नाम कटे हैं। SIR से पहले यहां 28 लाख मतदाता थे, जो अब घटकर 20 लाख रह गए हैं। वहीं नेपाल बॉर्डर से सटे बलरामपुर जिले में भी 25.98 फीसदी वोट काटे गए हैं।
मुस्लिम बहुल जिलों में 20 फीसदी तक नाम कटे
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने पहले ही SIR को लेकर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने की आशंका जताई थी। SIR के दौरान कई जगह नियमों के तहत फॉर्म जमा करने के बावजूद मुस्लिम परिवारों पर पुलिस कार्रवाई के आरोप भी लगे थे, जिसका देशभर में विरोध हुआ। ड्राफ्ट लिस्ट में साफ दिख रहा है कि यूपी के मुस्लिम बहुल जिलों सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, रामपुर और संभल में करीब 20 फीसदी वोटरों के नाम काटे गए हैं। इन जिलों में मुस्लिम आबादी 40 से 50 फीसदी के बीच मानी जाती है।
सियासी गणित पर पड़ेगा असर?
इन पांच जिलों में कुल 28 विधानसभा सीटें हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में इनमें से 17 सीटें सपा गठबंधन और 11 सीटें बीजेपी-एनडीए के खाते में गई थीं। SIR के बाद यहां भारी कटौती को लेकर राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं। मुरादाबाद में 15.76 फीसदी, सहारनपुर में 16.37 फीसदी, मुजफ्फरनगर में 16.29 फीसदी, रामपुर में 18.29 फीसदी और संभल में भी करीब 18 फीसदी वोटरों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटा दिए गए हैं।
चुनाव आयोग की सफाई
चुनाव आयोग के मुताबिक, SIR के दौरान नाम कटने की मुख्य वजहें सामने आई हैं। आयोग का कहना है कि, 46.23 लाख वोटरों की मौत हो चुकी है, 2.17 करोड़ वोटर दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं, 25.47 लाख नाम डुप्लीकेट पाए गए, इन्हीं कारणों से कुल 2.89 करोड़ नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं।



