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डिजिटल पंजाब की पहल: मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में प्रशासनिक सुधारों की सफलता घर बैठे सेवाएं: ‘भगवंत मान सरकार तुहाड़े द्वार’ योजना से 1.85 लाख नागरिकों को फायदा पारदर्शिता और दक्षता: राजस्व विभाग में ऑनलाइन 12.46 लाख आवेदनों का निपटारा, पेंडेंसी घटकर 0.33%

Chandigarh news: मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने वर्ष 2025 तक राज्य के प्रशासनिक ढांचे को पूरी तरह से डिजिटल और नागरिक-अनुकूल बनाकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। पंजाब आज देश का ऐसा राज्य बनकर उभरा है जहाँ ‘सरकार दफ्तरों से नहीं, बल्कि लोगों के घरों से’ चल रही है। प्रशासनिक सुधारों की इस लहर ने न केवल सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही तय की है, बल्कि दशकों से चली आ रही ‘सिफारिश और देरी’ की संस्कृति को भी जड़ से उखाड़ फेंका है।
घर बैठे सेवाएं उपलब्ध:
इस परिवर्तनकारी बदलाव की जानकारी देते हुए कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने बताया कि राज्य सरकार की दूरदर्शी नीतियों के कारण आज पंजाब का आम नागरिक अपने घर की चौखट पर बैठकर सरकारी सेवाओं का लाभ उठा रहा है। ‘भगवंत मान सरकार तुहाड़े द्वार’ योजना इस डिजिटल क्रांति का सबसे मजबूत स्तंभ साबित हुई है, जिसके माध्यम से अब तक 1.85 लाख से अधिक नागरिकों को उनके घर पर ही 437 प्रकार की विभिन्न सेवाएं प्रदान की जा चुकी हैं। यह योजना न केवल समय की बचत कर रही है, बल्कि बुजुर्गों और ग्रामीण क्षेत्र के निवासियों के लिए एक बड़े सहारे के रूप में उभरी है।
राजस्व विभाग में दक्षता:
प्रशासनिक दक्षता का सबसे बड़ा उदाहरण राजस्व विभाग में देखने को मिला है, जहाँ पटवारियों द्वारा 12.46 लाख से अधिक आवेदनों का ऑनलाइन निपटारा किया गया है। तकनीक के इस समावेश ने जमीन-जायदाद से जुड़े उन कार्यों को सरल बना दिया है जो कभी भ्रष्टाचार और देरी का मुख्य केंद्र हुआ करते थे। अब पूरी प्रक्रिया पेपरलेस हो चुकी है और क्यूआर-कोडेड डिजिटल सर्टिफिकेट के माध्यम से सुरक्षा और प्रामाणिकता को नया आयाम मिला है। इससे नागरिकों को अब दफ्तरों के चक्कर काटने या बिचौलियों की मदद लेने की कोई आवश्यकता नहीं रह गई है।
डिजिटल निगरानी और पारदर्शिता:
सरकार की इस सफलता का मुख्य आधार ‘डिजिटल डैशबोर्ड’ के माध्यम से की जा रही रियल-टाइम निगरानी है। इस अत्याधुनिक सिस्टम की बदौलत सभी विभागीय सेवाओं की पेंडेंसी (लंबित मामले) घटकर अब मात्र 0.33% रह गई है, जो राज्य के प्रशासनिक इतिहास में अब तक का सबसे निचला स्तर है। मंत्री अमन अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान का स्पष्ट निर्देश है कि जनता का काम बिना किसी बाधा के समय सीमा के भीतर होना चाहिए। आज पंजाब ने यह साबित कर दिया है कि तकनीक और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के मेल से एक पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त शासन व्यवस्था स्थापित की जा सकती है, जो सीधे तौर पर आम आदमी के कल्याण के लिए समर्पित है।



