उन्नाव दुष्कर्म कांड को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपी की बेटी इशिता सेंगर का भावुक पोस्ट वायरल
सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव दुष्कर्म कांड में HC के जमानत आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट के फैसले के बाद आरोपी कुलदीप सेंगर की बेटी इशिता सेंगर का भावुक पोस्ट सामने आया। इशिता ने सोशल मीडिया पर धमकियों, डर और अपनी खोती पहचान को लेकर दर्द साझा किया।

Uttar Pradesh: उन्नाव दुष्कर्म कांड एक बार फिर देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। इस मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दोषी कुलदीप सिंह सेंगर को दी गई जमानत पर रोक लगा दी। कोर्ट के इस फैसले के बाद आरोपी की बेटी डॉक्टर इशिता सेंगर का एक भावुक सोशल मीडिया पोस्ट सामने आया है, जिसने लोगों का ध्यान खींचा है। इशिता सेंगर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर लंबा नोट साझा करते हुए अपनी पीड़ा बयां की है। उन्होंने लिखा कि बीते आठ वर्षों से वह केवल “एक विधायक की बेटी” या “दोषी की बेटी” के रूप में पहचानी जा रही हैं, जबकि उनकी अपनी पहचान कहीं खो गई है।
‘थक गई हूं, डरी हुई हूं’ — इशिता सेंगर
इशिता ने अपने पोस्ट में लिखा कि उनकी चुप्पी को कमजोरी समझा गया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें सोशल मीडिया पर बार-बार कहा गया कि वह अब तक जिंदा क्यों हैं। साथ ही उन्हें बलात्कार और हत्या जैसी धमकियां भी दी जाती रही हैं। इशिता के मुताबिक, यह नफरत किसी कल्पना का हिस्सा नहीं बल्कि उनकी रोजमर्रा की सच्चाई बन चुकी है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके परिवार ने पिछले आठ सालों से कानून और संविधान पर भरोसा रखते हुए किसी भी टीवी डिबेट या सार्वजनिक प्रदर्शन से दूरी बनाए रखी। लेकिन अब उन्हें महसूस हो रहा है कि धीरे-धीरे उनकी गरिमा छीनी जा रही है। इशिता ने कहा कि उन्होंने कई अधिकारियों और मीडिया संस्थानों को पत्र लिखे, लेकिन उनकी बात इसलिए अनसुनी कर दी गई क्योंकि उनका “सच” किसी के एजेंडे में फिट नहीं बैठता था।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
इशिता का यह भावुक बयान ऐसे समय सामने आया है, जब सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को सशर्त जमानत देने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषी को फिलहाल किसी भी तरह की राहत नहीं दी जा सकती। इस फैसले के बाद एक बार फिर उन्नाव दुष्कर्म कांड से जुड़ी बहस तेज हो गई है, जिसमें न्याय, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे सवाल उठ रहे हैं।



