कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित, पीड़िता बोली– मेरी मुश्किलें और बढ़ीं

दिल्ली हाईकोर्ट से सजा निलंबन के बाद उन्नाव दुष्कर्म कांड की पीड़िता ने सुरक्षा को लेकर जताई गंभीर चिंता। पीड़िता का आरोप– कुलदीप सिंह सेंगर के बाहर आने की खबर के बाद परिवार को मिल रही हैं धमकियां। पिता की मौत का मामला अभी लंबित, फैसले तक जमानत पर पूरी तरह बाहर नहीं आ सकेंगे सेंगर।

Uttar Pradesh: दिल्ली हाईकोर्ट से पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित होने के बाद उन्नाव दुष्कर्म कांड की पीड़िता का दर्द एक बार फिर सामने आ गया है। पीड़िता ने कहा है कि इस फैसले के बाद उसका और उसके परिवार का डर कई गुना बढ़ गया है। उसका आरोप है कि सेंगर बाहुबली किस्म के नेता हैं और उनके बाहर आने की खबर के बाद परिवार को लगातार धमकियां मिल रही हैं। पीड़िता के अनुसार, उसके पिता की मौत के मामले में जेल से छूटकर आए कुछ लोग अब खुलेआम कह रहे हैं कि “अब कुलदीप भइया बाहर आ ही गए हैं, एक-एक से निपटा जाएगा।” इससे परिवार की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि कुलदीप सिंह सेंगर को केवल दुष्कर्म मामले में सजा निलंबन की राहत मिली है। पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत से जुड़े मामले में उनकी अपील अभी दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है। उस मामले में फैसला आने के बाद ही वे पूरी तरह जमानत पर बाहर आ सकेंगे।

 

आठ साल पुराना माखी दुष्कर्म कांड

साल 2017 में सामने आए माखी दुष्कर्म कांड ने देश-विदेश में हलचल मचा दी थी। तब 17 वर्षीय किशोरी ने आरोप लगाया था कि 4 जून 2017 को तत्कालीन विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने उसे नौकरी दिलाने का झांसा देकर अपने आवास बुलाया और दुष्कर्म किया। पीड़िता जब अपने परिवार के साथ थाने पहुंची तो आरोपी के राजनीतिक प्रभाव के चलते पुलिस ने मुकदमा तक दर्ज नहीं किया। जून 2017 से मार्च 2018 तक कई शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।

 

पिता की मौत के बाद हुई गिरफ्तारी

3 अप्रैल 2018 को पीड़िता के पिता के साथ मारपीट की गई और उल्टा उन्हें ही जेल भेज दिया गया। 8 अप्रैल 2018 को पीड़िता ने लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह का प्रयास किया। अगले ही दिन तड़के जेल में पिता की तबीयत बिगड़ी और जिला अस्पताल में उनकी मौत हो गई। इसके बाद मामला तूल पकड़ गया। कुलदीप सेंगर, उनके भाई अतुल समेत अन्य पर मुकदमा दर्ज हुआ। 13 अप्रैल 2018 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई और उसी दिन सीबीआई ने सेंगर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। भाजपा ने भी उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था।

 

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

28 जुलाई 2019 को पीड़िता अपने परिजनों के साथ रायबरेली जेल में बंद चाचा से मिलने जा रही थी, तभी उनकी कार को एक ट्रक ने टक्कर मार दी। इस हादसे में पीड़िता की चाची और मौसी की मौके पर मौत हो गई, जबकि पीड़िता और उसके वकील गंभीर रूप से घायल हुए। इलाज के करीब 15 महीने बाद वकील की भी मौत हो गई। परिवार ने इसे साजिश बताया। इसके बाद 1 अगस्त 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने खुद मामले का संज्ञान लिया, ट्रायल यूपी से दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट स्थानांतरित किया और पीड़िता व उसके परिवार को सुरक्षा देने के आदेश दिए।

 

तीस हजारी कोर्ट का फैसला

20 दिसंबर 2019 को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को नाबालिग से दुष्कर्म का दोषी ठहराया। 21 दिसंबर को अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई और 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जिसमें से 10 लाख रुपये पीड़िता को मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया गया। मार्च 2020 में पीड़िता के पिता की मौत के मामले में भी कोर्ट ने सेंगर समेत आठ आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई थी।

 

सुरक्षा हटने पर फिर बढ़ी चिंता

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 1 अगस्त 2019 से पीड़िता और उसके परिवार को सीआरपीएफ सुरक्षा मिली थी। यह सुरक्षा साढ़े छह साल से ज्यादा समय तक रही। लेकिन 3 अप्रैल 2025 को परिवार से सीआरपीएफ सुरक्षा हटा ली गई, केवल पीड़िता को दिल्ली यूनिट की सुरक्षा दी गई। अब सजा निलंबन के बाद परिवार की चिंता और बढ़ गई है।

 

पुलिस अधिकारियों को भी हुई थी सजा

पीड़िता के पिता की मौत के मामले में माखी थानाध्यक्ष अशोक भदौरिया और हल्का प्रभारी दारोगा केपी सिंह को भी हत्या की साजिश और फर्जी मुकदमे में दोषी ठहराया गया था। सीबीआई ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

 

सेंगर परिवार की प्रतिक्रिया

कुलदीप सिंह सेंगर की पत्नी और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष संगीता सेंगर ने कहा कि उन्हें सजा निलंबन की जानकारी दोपहर बाद मिली। उन्होंने कहा, “मैं न्यायपालिका के फैसले का सम्मान करती हूं और मुझे पूरा विश्वास है कि हमें न्याय मिलेगा।” वहीं, उनकी मौसी सरोज सिंह ने कहा कि उनके भांजे को साजिश के तहत फंसाया गया। उन्होंने दावा किया कि जिसे जनता ने चार बार विधायक चुना, वह ऐसा घिनौना अपराध नहीं कर सकता।

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