डॉ. प्रेम कुमार बने बिहार विधानसभा के 18वें स्पीकर
बिहार विधानसभा को मिला नया स्पीकर डॉ. प्रेम कुमार निर्विरोध चुने गए सभी दलों ने दिया समर्थन और शुभकामनाएँ

सीनियर बीजेपी नेता डॉ. प्रेम कुमार सर्वसम्मति से बिहार विधानसभा के 18वें स्पीकर चुने गए हैं। खास बात यह है कि उनके चयन में विपक्षी विधायकों ने भी समर्थन दिया। सोमवार को उन्होंने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन किया था और चूंकि वह इकलौते उम्मीदवार थे, इसलिए उनका निर्विरोध चुना जाना लगभग तय था। बीजेपी कोटे से पहले विजय कुमार सिन्हा और नंदकिशोर यादव स्पीकर रह चुके हैं। इनके बाद प्रेम कुमार इस पद पर चुनें जाने वाले तीसरे भाजपा नेता बने हैं। इससे पहले जदयू के उदय नारायण चौधरी और विजय कुमार चौधरी स्पीकर रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रेम कुमार को बधाई देते हुए कहा कि “मैं पूरे सदन की ओर से उन्हें शुभकामनाएं देता हूं। उनका लंबा अनुभव सदन के कामकाज में बड़ी भूमिका निभाएगा।” उन्होंने सभी सदस्यों से खड़े होकर नए स्पीकर का सम्मान करने का अनुरोध भी किया।
कौन हैं डॉ. प्रेम कुमार?
डॉ. प्रेम कुमार बिहार भाजपा के सबसे वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं में शामिल हैं। वह गया शहर से लगातार नौ बार विधायक चुने गए हैं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। 70 वर्षीय प्रेम कुमार वर्ष 1990 में पहली बार चुनाव जीते थे और तब से लगातार जीत दर्ज करते रहे हैं। वे अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के प्रमुख नेता माने जाते हैं। उन्होंने मगध विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री हासिल की है। अपने राजनीतिक करियर में वे अब तक 10 से ज्यादा विभागों के मंत्री रह चुके हैं। 2005 में पहली बार मंत्री बने, 2010, 2017–2020 और 2020–2024 के दौरान भी मंत्री पद संभाला, 2015 में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे
नए विधायकों के लिए विशेष कार्यशाला
डॉ. प्रेम कुमार ने बताया कि इस बार सदन में 100 से अधिक नए विधायक चुनकर आए हैं। इन्हें संसदीय प्रक्रियाओं की जानकारी देने के लिए विशेष कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इस प्रशिक्षण में नए सदस्यों को समझाया जाएगा: प्रश्नकाल, शून्यकाल, तारांकित/अतारांकित प्रश्न, अल्पसूचना प्रश्न, और अन्य संसदीय प्रक्रियाएँ, उन्होंने कहा कि विधायकों को अपने क्षेत्रों से जुड़े प्रासंगिक प्रश्न पूछने की कला सीखनी होगी ताकि सदन में सार्थक चर्चा हो सके और जनता की समस्याओं का समाधान प्रभावी तरीके से उठाया जाए। प्रेम कुमार ने स्पष्ट कहा कि वे सदन का संचालन पूरी तरह “प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमावली” के अनुसार करेंगे और सभी दलों को साथ लेकर चलेंगे।



