स्वच्छ भारत मिशन के 11 साल: कितनी बदली देश की तस्वीर?
PM मोदी के स्वच्छ भारत अभियान ने 11 साल में देश की सफाई व्यवस्था को नई दिशा दी। घर-घर टॉयलेट निर्माण से ODF लक्ष्य हासिल हुआ और लाखों गांवों में कचरा प्रबंधन सुधरा। इस मिशन ने स्वास्थ्य, सम्मान और स्वच्छता की तस्वीर बदलकर बड़ा बदलाव दिखाया।

नई दिल्ली: साल 2014 में सत्ता में आने के बाद पीएम मोदी ने पूरे जोर-शोर से स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया था। 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की जयंती पर लॉन्च हुआ यह मिशन अब 11 साल पूरे कर चुका है। इन वर्षों में देश की सफाई व्यवस्था में बड़ी और दिखाई देने वाली बदलाव देखने को मिले हैं। इस मिशन का मुख्य लक्ष्य था—खुले में शौच को खत्म करना, ठोस व तरल कचरे के प्रबंधन को बेहतर बनाना और खासकर महिलाओं व ग्रामीण गरीबों के सम्मान और सेहत की रक्षा करना।
भारत ने कैसे हासिल किया ODF का लक्ष्य?
स्वच्छ भारत मिशन फेज-1 के दौरान भारत ने 2019 तक ग्रामीण इलाकों में 100% स्वच्छता कवरेज हासिल कर ली। इसमें 10 करोड़ से ज्यादा घरों में टॉयलेट (IHL) बनाए गए। इसके बाद देश के सभी गांवों ने खुद को ओपन डिफिकेशन फ्री (ODF) घोषित कर दिया।
अपशिष्ट प्रबंधन में क्या बदलाव आए?
अप्रैल 2020 में मिशन का फेज-2 शुरू हुआ। इसका फोकस था—ODF स्थिति को बनाए रखना और ODF Plus की ओर बढ़ना, यानी ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन (SLWM) को मजबूत बनाना। 17 मार्च 2025 तक देश के 5.86 लाख गांवों में से 5.64 लाख गांव ODF घोषित हो चुके हैं। इनमें 1.12 लाख आकांक्षी, 7,337 राइजिंग और 4.44 लाख आदर्श गांव शामिल हैं। इसके अलावा 5.03 लाख गांवों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन लागू कर दिया गया है।
हर मिनट 21 टॉयलेट कैसे बने?
11 साल में देश में कुल 12 करोड़ टॉयलेट बनाए गए। साथ ही 2.53 लाख पब्लिक टॉयलेट भी बने। अगर इसका साधारण गणित लगाएं तो साफ होता है कि पिछले 11 साल में भारत ने हर मिनट 21 टॉयलेट बनाए। इससे खुले में शौच की समस्या लगभग खत्म हुई और लोगों की सेहत व स्वच्छता में बड़ा सुधार आया। टॉयलेट बनाने में केंद्र और राज्यों का खर्च कैसे बंटता है? इस योजना में केंद्र और राज्य दोनों को धन देना होता है। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में खर्च का बंटवारा 90:10 है। बाकी राज्यों में केंद्र का हिस्सा 60% और राज्यों का 40% होता है।



