लखनऊ में रिटायर्ड इंजीनियर को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का झांसा, साइबर ठगों ने 38 लाख रुपए हड़पे
लखनऊ में रिटायर्ड इंजीनियर को मुंबई क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर ठगों ने “डिजिटल अरेस्ट” का झांसा देकर 38 लाख रुपए हड़प लिए। पीड़ित ने साइबर थाने में शिकायत दी, पुलिस ने मामला दर्ज कर चार लाख रुपए फ्रीज कराए।

लखनऊ: लखनऊ के जानकीपुरम गार्डन निवासी 65 वर्षीय रिटायर्ड इंजीनियर अश्वनी कुमार गुप्ता साइबर ठगी का शिकार हो गए। ठगों ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” की धमकी दी और 38 लाख रुपए ठग लिए। पीड़ित ने बताया कि 30 सितंबर को अज्ञात नंबर से आए कॉल पर व्यक्ति ने कहा कि उनका आधार कार्ड लीक हो गया है और उनके खिलाफ मनी लांड्रिंग व हवाला का केस दर्ज है। डराने के लिए कॉलर ने जांच के बहाने बैंक खातों और संपत्ति की पूरी जानकारी मांगी।
फर्जी दस्तावेज दिखाकर मंगाए रुपए
कॉल करने वाले ने व्हाट्सऐप पर फर्जी दस्तावेज भेजे और दावा किया कि उनके खातों की जांच हो रही है। उसने कहा कि जेल से बचने के लिए सभी रकम एक “सरकारी जांच खाते” में ट्रांसफर करनी होगी। डर के माहौल में अश्वनी गुप्ता ने 14 अक्टूबर को एसबीआई जानकीपुरम शाखा से 24.70 लाख रुपए और 16 अक्टूबर को पेंशन लोन लेकर 13.72 लाख रुपए बताए गए आईसीआईसीआई बैंक खाते में आरटीजीएस के जरिए भेज दिए।
एनओसी के नाम पर मांगे और पैसे
रकम भेजने के बाद ठगों ने एनओसी जारी करने के नाम पर फिर अतिरिक्त धन मांगा। तब जाकर अश्वनी को ठगी का एहसास हुआ। उन्होंने तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। जांच में सामने आया कि दो खातों से कुल 38.42 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए थे।
पुलिस जांच और रकम फ्रीज
साइबर थाना प्रभारी बृजेश यादव ने बताया कि मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ठगों के खातों से चार लाख रुपए फ्रीज कराए हैं। शेष रकम ट्रेस करने के लिए बैंक और साइबर सेल की मदद ली जा रही है।



