UPI ने फिर बनाया रिकॉर्ड, 35% ग्रोथ के साथ भारत बना दुनिया का डिजिटल पेमेंट लीडर
2025 की पहली छमाही में यूपीआई ट्रांजैक्शन में 35% की वृद्धि हुई। छोटे भुगतानों और ‘किराना इफेक्ट’ के चलते भारत डिजिटल पेमेंट में विश्व लीडर बन गया है। क्यूआर और POS लेनदेन में भी रिकॉर्ड उछाल दर्ज हुआ।

नई दिल्ली: भारत के यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) ने 2025 की पहली छमाही में एक नया मील का पत्थर हासिल किया है। वर्ल्डलाइन इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि में यूपीआई ट्रांजैक्शन में 35% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई। कुल 106.36 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी वैल्यू 143.34 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई। ये आंकड़े बताते हैं कि यूपीआई अब सिर्फ एक डिजिटल पेमेंट सिस्टम नहीं, बल्कि भारतीयों की रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है।
छोटे भुगतानों में तेजी से बढ़ा इस्तेमाल
रिपोर्ट में बताया गया है कि यूपीआई के औसत ट्रांजैक्शन साइज में मामूली गिरावट आई है—2024 की पहली छमाही में जहां यह 1,478 रुपए था, वहीं 2025 में घटकर 1,348 रुपए रह गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कमी नकारात्मक संकेत नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि अब यूपीआई का उपयोग केवल बड़े भुगतानों तक सीमित नहीं रहा। देशभर में लोग अब चाय, सब्जी, टैक्सी, ऑटो या किराने की छोटी खरीदारी में भी यूपीआई से भुगतान कर रहे हैं।
‘किराना इफेक्ट’ ने बढ़ाई रफ्तार
वर्ल्डलाइन रिपोर्ट के अनुसार, दुकानदारों या व्यापारियों को किए गए पर्सन–टू–मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन में 37% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो 67.01 अरब तक पहुंच गए हैं। इस तेजी को रिपोर्ट में ‘किराना इफेक्ट’ नाम दिया गया है। देशभर के छोटे दुकानदार, रेहड़ीवाले और माइक्रो बिजनेस अब डिजिटल पेमेंट को तेजी से अपना रहे हैं। इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि छोटे कारोबारियों की वित्तीय पहुंच और डिजिटल पहचान भी मजबूत हुई है।
क्यूआर और पीओएस सिस्टम का विस्तार
रिपोर्ट के मुताबिक, क्यूआर कोड आधारित भुगतान में 111% की वृद्धि हुई है। जून 2025 तक देश में क्यूआर ट्रांजैक्शन की संख्या बढ़कर 67.8 करोड़ हो गई। इसी तरह, पॉइंट–ऑफ–सेल (POS) टर्मिनलों की संख्या 29% बढ़कर 1.12 करोड़ पहुंच गई है। व्यापारी वर्ग अब डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को पहले से कहीं ज्यादा अपना रहा है, जिससे ग्राहकों और कारोबारियों दोनों के लिए भुगतान प्रक्रिया और पारदर्शिता आसान हुई है।



