“लव जिहाद वाले भी गरबे के लिए आएं, लेकिन..” – BJP नेता के बयान से बवाल, दुर्गा पंडाल में आने पर रखी शर्तें!

उज्जैन (मध्य प्रदेश)। नवरात्रि के पावन अवसर पर जहां पूरे प्रदेश में धार्मिक आयोजन हो रहे हैं, वहीं उज्जैन जिले के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल का एक बयान विवाद का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि “लव जिहाद वाले भी दुर्गा पंडालों में आ सकते हैं, लेकिन उन्हें कुछ शर्तों का पालन करना होगा।” इस बयान ने प्रदेश की राजनीति और समाज में नई बहस छेड़ दी है।
मंत्री ने रखीं शर्तें
मंत्री गौतम टेटवाल ने अपने बयान में कहा कि अगर कोई लव जिहाद का आरोपी या संदिग्ध भी गरबा या दुर्गा पंडाल में शामिल होना चाहता है, तो उसे कुछ धार्मिक परंपराओं का पालन करना होगा। शर्तें इस प्रकार हैं:
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पत्नी को साथ लेकर आना होगा।
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पत्नी को लाल साड़ी और मंगलसूत्र पहनना होगा।
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माथे पर तिलक और मांग में सिंदूर लगाना होगा।
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हाथ में कलावा बांधना होगा।
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गौ माता और गंगा को माँ का दर्जा देना होगा।
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पंडाल में प्रवेश करते समय जयकारा लगाना होगा।
गलत हरकत पर मिलेगी जेल की जगह
टेटवाल ने चेतावनी भी दी कि अगर कोई व्यक्ति दुर्गा पंडाल में बहू-बेटियों या वृद्ध महिलाओं को गलत नजर से देखेगा या अशोभनीय व्यवहार करेगा, तो उसकी जगह सीधे जेल होगी।
चुनरी यात्रा के दौरान दिया बयान
यह बयान मंत्री टेटवाल ने एक विशाल चुनरी यात्रा के दौरान दिया। इस धार्मिक यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए और माता के दरबार में चुनरी अर्पित की गई। इस मौके पर मंत्री ने कहा कि ऐसी यात्राएँ सामाजिक और धार्मिक एकता का प्रतीक हैं, लेकिन संस्कृति और आस्था का सम्मान सभी को करना चाहिए।
सोशल मीडिया और विपक्ष की प्रतिक्रिया
मंत्री के बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं।
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कुछ लोग इसे धार्मिक आस्था की रक्षा के लिए आवश्यक कदम बता रहे हैं।
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वहीं विपक्षी दल और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता इसे भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बता रहे हैं।
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कई लोगों का कहना है कि पंडालों में प्रवेश के लिए ऐसी शर्तें लगाना धर्मनिरपेक्ष भारत के सिद्धांतों के खिलाफ है।
हाल ही में अन्य विवादित बयान भी
यह पहली बार नहीं है जब गरबा और नवरात्रि आयोजनों को लेकर ऐसे बयान दिए गए हों। हाल ही में:
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भोपाल के भाजपा सांसद आलोक शर्मा ने चेतावनी दी थी कि गरबा पंडालों में “लव जिहाद” के नाम पर आने वालों की पहचान की जांच होनी चाहिए।
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वहीं विहिप (VHP) ने भी कुछ राज्यों में कहा था कि गरबा पंडालों में प्रवेश के लिए तिलक, रक्षा सूत्र और गौ माता को स्वीकारना जरूरी है।
कानूनी और सामाजिक सवाल
मंत्री के बयान ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या किसी धार्मिक आयोजन में प्रवेश के लिए ऐसी शर्तें लागू की जा सकती हैं? संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान धर्मनिरपेक्षता और समानता के सिद्धांतों से टकराता है। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाता है।



