एक और BJP मंत्री का पारा हाई: कर दी बुजुर्ग महिला की बेइज़्जती, लताड़कर बोले – “मै देश का मंत्री, तुम्हारा नहीं..”

त्रिशूर (केरल): केंद्रीय राज्य मंत्री सुरेश गोपी इन दिनों विवादों के घेरे में हैं। मामला उस समय सामने आया जब एक बुजुर्ग महिला ने उनसे करुवन्नूर सहकारी बैंक घोटाले में फंसी अपनी जमा राशि वापस दिलाने की गुहार लगाई। महिला की मांग सुनकर गोपी ने कहा, “ज्यादा बात मत करो, मैं देश का मंत्री हूँ।” यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए।
कार्यक्रम में उठी मदद की पुकार
यह घटना 12 सितंबर को त्रिशूर जिले के इरिंजलाकुड़ा में आयोजित ‘कलुंगु सौहृदम’ (Kalungu Souhridam) कार्यक्रम के दौरान हुई। यहां मौजूद बुजुर्ग महिला आनन्दवली ने सार्वजनिक मंच से सुरेश गोपी से अपील की कि वह उनकी जमा राशि वापस दिलवाने में मदद करें। आनन्दवली का पैसा करुवन्नूर सहकारी बैंक घोटाले में फंसा हुआ है।
चुनाव में किए गए वादे की याद दिलाई
आनन्दवली ने गोपी को याद दिलाया कि चुनाव के दौरान उन्होंने वादा किया था कि वह इस बैंक घोटाले से प्रभावित लोगों की मदद करेंगे। महिला ने उनसे अनुरोध किया कि क्या वह मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से मिलवाने में सहयोग कर सकते हैं।
गोपी का विवादित बयान
महिला की अपील पर सुरेश गोपी ने कहा, “ज्यादा बात मत करो, मैं देश का मंत्री हूँ।” जब महिला ने पलटकर पूछा, “क्या आप हमारे मंत्री नहीं हैं?”, तो गोपी ने साफ शब्दों में कहा, “नहीं, मैं देश का मंत्री हूँ।”
उनका यह जवाब सुनकर वहां मौजूद लोग सन्न रह गए। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर गोपी की तीखी आलोचना हो रही है।
महिला की आर्थिक स्थिति बेहद खराब
आनन्दवली ने बताया कि उनकी लगभग ₹1.75 लाख की जमा राशि बैंक में फंसी हुई है। अब उनके पास इलाज के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार या मंत्री मासिक मदद (लगभग ₹10,000) की व्यवस्था कर दें तो उनका इलाज और गुजर-बसर संभव हो पाएगा।
मंत्री ने राज्य सरकार पर डाली जिम्मेदारी
सुरेश गोपी ने अपने जवाब में कहा कि यह मामला पूरी तरह राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकरणों के अधीन है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जब्त की गई राशि को राज्य सरकार को स्वीकार करना चाहिए और प्रभावित जमाकर्ताओं के बीच वितरित करना चाहिए।
आलोचनाओं का सिलसिला
इस घटना के बाद विपक्षी दलों और आम जनता ने गोपी को निशाने पर लिया। कई लोगों ने इसे “संवेदनहीन व्यवहार” बताया। आलोचकों का कहना है कि एक जनप्रतिनिधि को जनता की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, खासकर जब बात बुजुर्ग और पीड़ित महिला की हो।
सफाई में क्या बोले सुरेश गोपी
विवाद बढ़ने के बाद गोपी ने कहा कि उनकी बात को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। उन्होंने सफाई दी कि कुछ लोग इस मामले को राजनीतिक लाभ के लिए हवा दे रहे हैं। हालांकि उन्होंने माना कि उनकी बात से महिला की भावनाएं आहत हुई होंगी।



