बड़ी खबर: बसपा के पूर्व विधायक और भाजपा नेता को उम्रकैद, 2 सगे भाइयों की हत्या में आया फैसला, खौफनाक थी वारदात!

जालौन, यूपी। जिले के चर्चित 31 साल पुराने डबल मर्डर केस में बसपा से विधायक रहे छोटे सिंह चौहान को अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह मामला प्रधानी चुनाव की रंजिश से जुड़ा था, जिसमें दो लोगों की दिन-दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। लंबे कानूनी संघर्ष, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद फिर से सुनवाई शुरू हुई और 11 सितंबर 2025 को फैसला आया। सजा सुनाए जाने के बाद छोटे सिंह चौहान ने इसे राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया और हाईकोर्ट में अपील करने का ऐलान किया।

कोर्ट में पेश नहीं होने पर NBW जारी, वकील बनकर कोर्ट में सरेंडर

कोर्ट में पेश नहीं होने पर 11 सितंबर से पहले ही उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था। पुलिस उन्हें तलाश रही थी, लेकिन वह चकमा देकर वकील के वेश में कोर्ट पहुंचे और सरेंडर कर दिया। कोर्ट कैंपस में बड़ी संख्या में वकीलों के बीच घुसकर उन्होंने खुद को आत्मसमर्पण कराया। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर रखी थी, फिर भी वह चकमा देने में सफल रहे।

सजा के बाद समर्थकों का अभिवादन, फैसले को चुनौती देने का ऐलान

सजा सुनाए जाने के बाद कोर्ट परिसर में उपस्थित उनके समर्थकों का मन भारी हो गया। पूर्व विधायक ने हाथ हिलाकर अभिवादन किया और मुस्कुराते हुए पुलिस वैन में बैठ गए। उन्होंने कहा, “मुझे न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है, लेकिन यह राजनीतिक षड्यंत्र है। मैं हाईकोर्ट जाकर न्याय की लड़ाई लड़ूंगा।”

1994 का डबल मर्डर – चुनावी रंजिश से जन्मा विवाद

यह घटना 30 मई 1994 की है। जालौन जिले के चुर्खी थाना क्षेत्र के बिनौरा बैध गांव में प्रधानी चुनाव की रंजिश के चलते दो लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पीड़ित पक्ष ने एफआईआर में आरोप लगाया था कि रुद्रपाल सिंह उर्फ लल्ले गुर्जर और उसके साथियों ने हथियारों से लैस होकर हमला किया। मौके पर दो लोगों की मौत हो गई थी जबकि एक गंभीर रूप से घायल हुआ था। जांच में छोटे सिंह चौहान समेत कई लोगों का नाम सामने आया।

केस वापस लिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

करीब दो दशक तक केस लंबित रहा। वर्ष 2007 में बसपा सरकार ने उनके खिलाफ केस वापस लेने का आदेश दिया था, लेकिन पीड़ित पक्ष ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 24 अप्रैल 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल और प्रदेश सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने केस की दोबारा सुनवाई का आदेश दिया। इसके बाद जालौन कोर्ट में 27 अगस्त 2025 से सुनवाई शुरू हुई और 11 सितंबर 2025 को फैसला सुनाया गया।

राजनीतिक करियर – बसपा से भाजपा तक

छोटे सिंह चौहान 2007 से 2012 तक कालपी विधानसभा सीट से बसपा के विधायक रहे। बाद में उन्होंने 2021 में भाजपा का दामन थाम लिया। सजा सुनाए जाने के बाद उन्होंने इसे राजनीतिक साजिश बताया और समर्थन जुटाने का प्रयास किया। कोर्ट में पेशी के दिन उन्होंने सोशल मीडिया पर भी लिखा कि षड्यंत्रकारी लोग उन्हें क्षेत्र में सक्रिय रहने से रोकना चाहते हैं।

 पुलिस की कार्रवाई – दोनों पक्षों पर मुकदमा दर्ज

सजा के बाद पुलिस ने उन्हें कस्टडी में लेकर जांच तेज कर दी है। साथ ही कोर्ट में पेश होने से पहले गैर जमानती वारंट जारी कर दिया गया था। सुरक्षा के लिए कई थानों की पुलिस तैनात रही। कोर्ट ने सुनवाई के बाद उन्हें दोषी करार दिया और उम्रकैद की सजा सुनाई। दोनों पक्षों की तरफ से मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।

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