यूपी BJP में बड़ा बवाल: राज्यमंत्री-पूर्व सांसद के खिलाफ भाजपा नेताओं ने खोला मोर्चा, 22 आरोपों की लिस्ट कर दी जारी

कानपुर देहात। प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी भाजपा इन दिनों जिले में गहरे अंदरूनी विवाद से जूझ रही है। सोमवार को यह गुटबाजी खुलकर सामने आई जब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला और उनके पति व पूर्व सांसद अनिल शुक्ल वारसी पर 22 गंभीर आरोप लगा दिए। आरोप लगाने वालों में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राजेश तिवारी, पूर्व जिलाध्यक्ष मनोज शुक्ला और रनियां विधानसभा प्रभारी डॉ. सतीश शुक्ला शामिल रहे।


भाजपा नेताओं का आरोप – कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न और जातीय राजनीति

अकबरपुर के शहजादपुर स्थित एक होटल में आयोजित प्रेसवार्ता में भाजपा नेताओं ने कहा कि वारसी दंपती लगातार पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न कर रहे हैं और संगठन को कमजोर कर रहे हैं। आरोप लगाया गया कि वे ब्राह्मण समाज के नाम पर जातीय विद्वेष फैलाकर धन उगाही में लिप्त हैं।


सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर सवाल

नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार अपराध पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है, लेकिन वारसी दंपती के कार्य सरकार और संगठन की छवि को धूमिल कर रहे हैं। साथ ही उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के खिलाफ अकबरपुर थाने में दिए गए बयान को भाजपा विरोधी और निंदनीय बताया गया।


अनिल शुक्ल वारसी का पलटवार – आरोप झूठे, भेजेंगे नोटिस

आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व सांसद अनिल शुक्ल वारसी ने कहा कि ये सभी आरोप निराधार और बेबुनियाद हैं। उनका कहना है कि जो भी धरना-प्रदर्शन किए गए, वे जनता और कार्यकर्ताओं के हित में थे। उन्होंने प्रेसवार्ता करने वाले नेताओं को चिह्नित करने की बात कहते हुए वकील के माध्यम से मानहानि का नोटिस भेजने की चेतावनी दी।


प्रतिभा शुक्ला का जवाब – “झूठ का पुलिंदा, जनता सब जानती है”

राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला ने कहा कि उनके ऊपर लगाए गए सभी आरोप “झूठ का पुलिंदा” हैं। उन्होंने प्रेसवार्ता करने वाले नेताओं को विरोधी खेमे का बताया और कहा कि इनकी कोई स्वतंत्र पहचान नहीं है।
उन्होंने कहा – “ब्राह्मण को ब्राह्मण से लड़ाने की राजनीति की जा रही है। कर्म से ब्राह्मण होता है, जन्म से नहीं।”


मंत्री ने साधा निशाना, विरोधियों की व्यक्तिगत मंशा बताई

प्रतिभा शुक्ला ने आरोप लगाया कि पूर्व जिलाध्यक्ष मनोज शुक्ला और राजेश तिवारी व्यक्तिगत कारणों से विरोध कर रहे हैं। वहीं, डॉ. सतीश शुक्ला विधानसभा में दावेदारी की मंशा से उनके खिलाफ माहौल बना रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह अनुसूचित समाज को भाजपा से जोड़ने का काम कर चुकी हैं और मुख्यमंत्री से मिलकर बिंदुवार स्थिति साफ करेंगी।


भाजपा के अंदरूनी कलह में उठे 22 गंभीर आरोप

भाजपा नेताओं ने प्रेसवार्ता में जिन 22 बिंदुओं पर वारसी दंपती के खिलाफ आरोप लगाए, वे इस प्रकार हैं –

  1. दल बदल: 2017 में भाजपा में आने से पहले बसपा और सपा में सक्रिय रहे।

  2. गाली-गलौज: मैथा सोसायटी के सचिव राकेश मिश्रा को जूतों से मारने की धमकी का ऑडियो वायरल।

  3. ब्राह्मण महासभा विवाद: 16 फरवरी 2023 को महासभा अध्यक्ष को गालियां व हरिजन एक्ट में फंसाने का आरोप।

  4. 2019 चुनाव विरोध: भाजपा प्रत्याशी का खुला विरोध किया, ऑडियो वायरल।

  5. 2024 चुनाव विरोध: वर्तमान सांसद को मान्यता नहीं दी, ऑडियो वायरल।

  6. खनन माफिया समर्थन: 1 मार्च 2024 को रनियां थाने में धरना, मंत्री पर अपशब्द।

  7. मड़ौली कांड बयान: ब्राह्मण मां-बेटी हत्या मामले पर विवादित बयान।

  8. बार-बार धरने: कई मौकों पर धरने पर बैठे।

  9. सीडीओ विरोध: सौम्या पांडेय के खिलाफ विकास भवन में धरना।

  10. बर्रा थाने में धरना: 30 दिसंबर 2024 को इंस्पेक्टर के खिलाफ धरना।

  11. एआरटीओ विरोध: 9 अक्तूबर 2021 को धरना।

  12. परशुराम न्यास विवाद: विवादित जमीन पर विधायक निधि से 25 लाख खर्च का प्रयास।

  13. एनजीटी बकाया: वारसी कैमिकल फैक्टरी पर करोड़ों का बकाया।

  14. चंदा उगाही: 28 जनवरी 2025 को दबाव डालकर चंदा वसूलने का आरोप।

  15. विकास दुबे के परिजन: हत्यारे के भाई अनुराग दुबे को संरक्षण देने का आरोप।

  16. खनन माफिया संरक्षण: 25 मई 2024 को खनन माफियाओं को संरक्षण।

  17. भाई के जरिए कार्य: देवर अखिलेश कुमार शुक्ला से विधायक निधि के कार्य कराना।

  18. अधिकारियों को धमकी: 24 जुलाई 2025 को डीएम समेत अधिकारियों को जेल भेजने की धमकी।

  19. सांसद विरोध: वर्तमान सांसद को न मानना, कार्यकर्ताओं से अभद्रता।

  20. भर्ती में दबाव: मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्स भर्ती में दबाव डालना।

  21. रिंग रोड घोटाला: राज कार्पोरेशन लिमिटेड से 25 लाख की मांग और मारपीट।

  22. धन उगाही: बिल्हौर विधानसभा में ठेकेदारों को प्रताड़ित करना।


भाजपा के लिए चुनौती बनी गुटबाजी

कानपुर देहात की यह गुटबाजी भाजपा के लिए गंभीर चुनौती बन गई है। एक ओर वरिष्ठ नेता 22 बिंदुओं पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं तो दूसरी ओर मंत्री और पूर्व सांसद इसे विपक्षी षड्यंत्र और व्यक्तिगत रंजिश बता रहे हैं। अब पूरा मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच चुका है और पार्टी नेतृत्व के फैसले का इंतजार है।

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