UP: 40 ठाकुर विधायकों ने उड़ाई दिल्ली-लखनऊ की नींद, बनाया कुटुंब परिवार.. होटल में साथ दिखे SP-BJP MLA !

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा सत्र के बीच राजधानी के एक फाइव स्टार होटल में हुई गुपचुप बैठक ने सूबे की राजनीति में हलचल मचा दी है। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में करीब 40 विधायक और विधान परिषद सदस्य मौजूद थे, जिनमें सत्तापक्ष, विपक्ष और समाजवादी पार्टी के बागी विधायक भी शामिल थे। बैठक का असली एजेंडा भले ही आधिकारिक रूप से सामने न आया हो, लेकिन एक खास जाति के नेताओं की इतनी बड़ी एकजुटता ने जातीय समीकरणों और आने वाले राजनीतिक बदलावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री की जाति के नेताओं की मौजूदगी, लेकिन CM नदारद
जानकारी के मुताबिक इस बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जाति के विधायक बड़ी संख्या में मौजूद थे। हालांकि सीएम योगी स्वयं शामिल नहीं हुए, फिर भी लखनऊ से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा जोरों पर है। बैठक से जुड़ी तस्वीर में ‘कुटुंब परिवार’ का बैनर स्पष्ट दिख रहा है, जिसके नीचे करीब 40 जनप्रतिनिधि एक साथ बैठे नजर आ रहे हैं।
ठाकुर रामवीर की ऐतिहासिक जीत या जन्मदिन का बहाना?
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में बीजेपी विधायक ठाकुर रामवीर सिंह और एमएलसी जयपाल सिंह व्यस्त की फोटो लगी है। मुरादाबाद की कुंदरकी सीट से विधायक रामवीर सिंह ने हाल ही में उपचुनाव में सपा उम्मीदवार को भारी मतों से हराया था, जिसे बीजेपी अपनी बड़ी जीत मान रही है। कुछ का कहना है कि बैठक इसी जीत का जश्न थी, जबकि आयोजनकर्ता ने इसे पोती के जन्मदिन का बहाना बताया।
सपा के बागियों से लेकर बीजेपी नेताओं तक की भागीदारी
बैठक में सपा से निष्कासित एमएलसी राकेश प्रताप सिंह, विधायक अभय सिंह, बीजेपी विधायक अभिजीत सांगा, एमएलसी शैलेंद्र प्रताप सिंह समेत कई प्रभावशाली चेहरे मौजूद रहे। विधानसभा सत्र के दौरान इतनी बड़ी संख्या में विधायकों और एमएलसी का एक साथ सदन से बाहर इकट्ठा होना, इसे महज सामाजिक मिलन से ज्यादा राजनीतिक रणनीति का हिस्सा दर्शा रहा है।
मनोज कुमार सिंह को सेवा विस्तार न मिलने पर क्षत्रिय नाराजगी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पूर्व मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह को सीएम के समर्थन के बावजूद सेवा विस्तार न मिलने से क्षत्रिय समाज में असंतोष है। अन्य राज्यों में मुख्य सचिवों को सेवा विस्तार देने के उदाहरण मौजूद हैं, लेकिन यूपी में मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी सहित कुछ नेताओं की शिकायतों के चलते ऐसा नहीं हुआ। यह नाराजगी अब खुलकर जातीय लामबंदी के रूप में सामने आ रही है।
पश्चिम यूपी से शुरू हुई असंतोष की लहर
लोकसभा चुनाव 2024 में टिकट वितरण के समय गाजियाबाद से केंद्रीय मंत्री जनरल वी.के. सिंह का टिकट काटकर अतुल गर्ग को उम्मीदवार बनाए जाने से क्षत्रिय समाज में असंतोष पनपा। बैठक के आयोजक एमएलसी जयपाल सिंह व्यस्त और विधायक ठाकुर रामवीर सिंह भी पश्चिमी यूपी के प्रभावशाली नेता हैं, जिससे इस सभा के राजनीतिक निहितार्थ और गहरे हो जाते हैं।
पर्दे के पीछे दो बाहुबली और प्रतीकात्मक तोहफे
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक की रणनीति सरकार के करीबी दो बाहुबली विधायकों ने तैयार की। बैठक में शामिल सभी विधायकों को भगवान श्रीराम की मूर्ति, महाराणा प्रताप की तस्वीर और पीतल का बड़ा त्रिशूल उपहार स्वरूप दिया गया—जो एक स्पष्ट सांकेतिक संदेश माना जा रहा है।
वसुंधरा राजे की मुलाकात ने बढ़ाई अटकलें
बैठक से एक दिन पहले राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे ने सीएम योगी से मुलाकात की थी। उन्हें बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के संभावित दावेदारों में गिना जा रहा है, जिससे यह बैठक और ज्यादा राजनीतिक महत्व पा गई है।
आयोजकों के अलग-अलग बयान, मकसद पर पर्दा
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ठाकुर रामवीर सिंह: “मेरी पोती का जन्मदिन था, कुछ परिचित बुलाए थे। ‘कुटुंब परिवार’ नाम होटल वालों ने गलत लिख दिया।”
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एमएलसी शैलेंद्र कुमार सिंह: “कोई विशेष एजेंडा नहीं था, बस खाना-पीना और मुलाकात।”
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एमएलसी जयपाल सिंह व्यस्त: “रामवीर सिंह की चुनावी जीत की खुशी में पार्टी थी। सभी परिचित सदस्य थे, इसलिए ‘कुटुंब’ नाम रखा।”
ठाकुर विधायकों की राजनीतिक ताकत
यूपी विधानसभा की 403 सीटों में 49 ठाकुर विधायक हैं, जिनमें 43 बीजेपी के पास हैं। ब्राह्मण और ठाकुर मिलाकर 101 विधायक हैं—यानी हर चौथा विधायक इन दो जातियों से आता है। सपा के चार ठाकुर विधायक थे, जिनमें से राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह अब खुलकर बीजेपी के करीब हैं।



