संसद में विपक्ष का बड़ा दांव, ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव और CEC को हटाने की तैयारी

स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का नोटिस देने की तैयारी संसद के बजट सत्र में बढ़ा सियासी टकराव

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान विपक्ष सरकार और संवैधानिक पदों को लेकर आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने जा रहे हैं। वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए भी नोटिस देने की योजना बनाई गई है। इन दोनों मुद्दों पर विपक्षी दल एकजुट नजर आ रहे हैं।

 

ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव

सूत्रों के अनुसार, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही के दौरान पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने का पर्याप्त मौका नहीं दिया। बताया जा रहा है कि कांग्रेस सांसद मंगलवार को सदन में इस प्रस्ताव को पेश करेंगे। हालांकि इसके लिए पहले सदन की अनुमति यानी ‘लीव ऑफ द हाउस’ लेनी होगी।

 

प्रस्ताव पर चर्चा की तैयारी

जानकारी के मुताबिक केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू इस प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत कर सकते हैं। बीजेपी की ओर से अनुराग ठाकुर, निशिकांत दुबे, रविशंकर प्रसाद और भर्तृहरि महताब अपनी बात रख सकते हैं। वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के चिराग पासवान भी इस मुद्दे पर सदन में बोल सकते हैं। दूसरी ओर कांग्रेस की तरफ से गौरव गोगोई, मनीष तिवारी, दीपेंद्र सिंह हुड्डा और जोथिमणि स्पीकर के खिलाफ विपक्ष का पक्ष रखेंगे।

 

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की तैयारी

इसी बीच विपक्ष पहली बार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए भी नोटिस देने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक नोटिस का मसौदा तैयार कर लिया गया है और इसे इसी हफ्ते संसद में जमा किया जा सकता है। तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ सांसद ने बताया कि यह विपक्षी दलों की संयुक्त रणनीति का हिस्सा है। उनका कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त जैसे अहम पद की गरिमा बनाए रखना जरूरी है।

 

I.N.D.I.A. गठबंधन के दल भी साथ

बताया जा रहा है कि I.N.D.I.A. गठबंधन के लगभग सभी दल इस पहल में शामिल हैं। नियमों के मुताबिक, ऐसे प्रस्ताव के लिए लोकसभा के कम से कम 100 और राज्यसभा के 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। कानून के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने जैसी ही होती है। इसके लिए ‘साबित दुराचार’ या ‘अक्षमता’ के आधार पर ही प्रस्ताव लाया जा सकता है और इसे पास कराने के लिए सदन में विशेष बहुमत की जरूरत होती है।

 

ममता बनर्जी ने भी दिया समर्थन

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भी संकेत दिया है कि अगर विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव लाता है तो उनकी पार्टी इसका समर्थन करेगी। फिलहाल संसद के मौजूदा सत्र में इन दोनों मुद्दों को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है और आने वाले दिनों में इस पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

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