शिवसेना मंत्री शंभुराज देसाई का बयान, “शिंदे की बगावत से BJP को दोबारा सत्ता मिली”
2022 में शिंदे की बगावत को देसाई ने बताया सत्ता परिवर्तन की बड़ी वजह बीजेपी की वापसी में शिवसेना की भूमिका पर फिर जोर बीजेपी नेताओं के ताज़ा बयानों से महायुति में बढ़ा तनाव

शिवसेना के मंत्री शंभुराज देसाई ने शनिवार को कहा कि 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत ने विपक्ष में बैठी बीजेपी के लिए महाराष्ट्र में दोबारा सत्ता में आने का रास्ता खोल दिया। देसाई ने कहा कि राज्य की राजनीति में शिवसेना की भूमिका हमेशा से निर्णायक रही है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब एक दिन पहले ही बीजेपी नेता और मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने दावा किया था कि देवेंद्र फडणवीस न सिर्फ पार्टी के प्रमुख चेहरे हैं, बल्कि राज्य की अन्य राजनीतिक पार्टियों के कामकाज पर भी असर डालते हैं। इन बयानों को लेकर शिवसेना में नाराजगी भी दिख रही है।
बीजेपी नेताओं के बयानों से शिवसेना नाराज
शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना और अजित पवार की NCP, बीजेपी के साथ मिलकर महायुति सरकार का हिस्सा हैं।लेकिन कुछ बीजेपी नेताओं के हालिया बयानों ने शिवसेना की लीडरशिप को असहज कर दिया है। शिवसेना की नाराजगी का बड़ा कारण महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण का बयान है, क्योंकि शिवसेना के कुछ नेताओं का बीजेपी में शामिल होना पार्टी के भीतर तनाव बढ़ा रहा है। देसाई ने याद दिलाया कि 2019 में महा विकास अघाड़ी (MVA) बनने के बाद बीजेपी को विपक्ष में बैठना पड़ा था, जबकि उद्धव ठाकरे, NCP और कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता में आए थे।
“शिंदे के फैसले ने बदला राजनीतिक माहौल”
देसाई ने कहा कि MVA सरकार के दौरान NCP और कांग्रेस को मजबूत किया जा रहा था। लेकिन 2022 में शिंदे के कड़े फैसले के बाद 50 विधायक उनके साथ आए, जिसने उद्धव ठाकरे की सरकार गिरा दी। देसाई के मुताबिक, इस बगावत ने महाराष्ट्र का राजनीतिक माहौल पूरी तरह बदल दिया, और बीजेपी को दोबारा सत्ता में आने का रास्ता मिला।
“शिंदे ने शिवसेना-BJP गठबंधन को मजबूत किया”
देसाई ने यह भी कहा कि हर बड़ा फैसला उस समय के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सहमति से ही लिया जाता था।उनके अनुसार, 2022 में शिंदे के कदम से BJP को सत्ता में बेहतर हिस्सेदारी मिली, शिवसेना-BJP गठबंधन और मजबूत हुआ, और महायुति सरकार की सफलता में शिंदे की भूमिका सबसे अहम रही। देसाई ने कहा कि शिंदे की तेज़ कार्यशैली, फैसला लेने की क्षमता और गति ने चुनावों में महायुति को बड़ा फायदा दिया।



