विदाई के लम्हे: CJI गवई का भावुक आखिरी दिन
सुप्रीम कोर्ट में CJI बीआर गवई को दी गई भावुक विदाई। 6 महीने 10 दिन के छोटे लेकिन ऐतिहासिक कार्यकाल का समापन। पहले बौद्ध CJI रहे गवई ने सेवा को सर्वोच्च बताया।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई का आज सुप्रीम कोर्ट में आखिरी कार्य दिवस रहा। शुक्रवार को उनके सम्मान में सेरेमोनियल बेंच लगी, जहां बार और बेंच के कई वरिष्ठ सदस्य मौजूद रहे। गवई 23 नवंबर को आधिकारिक तौर पर रिटायर हो रहे हैं।
6 महीने 10 दिन का कार्यकाल, कई अहम माइलस्टोन
बीआर गवई का CJI के रूप में कार्यकाल लगभग 6 महीने 10 दिन का रहा। वह इस पद पर पहुँचने वाले पहले बौद्ध और दूसरे दलित चीफ जस्टिस रहे। कोर्ट रूम-1 में उनकी विदाई के दौरान माहौल भावुक था।
फूल फेंकने की कोशिश पर गवई का रिएक्शन
समारोह में कुछ वकील फूलों की पंखुड़ियां लेकर आए थे और उन्हें CJI गवई पर डालना चाहते थे। तभी गवई ने मुस्कुराते हुए कहा, “नहीं, नहीं, मत फेंकिए। इसे कोर्ट मास्टर को दे दीजिए।” उनका ये रिएक्शन कोर्टरूम में मौजूद लोगों को मुस्कुराने पर मजबूर कर गया।
देश के पहले बौद्ध चीफ जस्टिस
52वें CJI रहे गवई दलित समुदाय से दूसरे और बौद्ध धर्म से आने वाले पहले चीफ जस्टिस थे। उनका कार्यकाल 14 मई 2025 को शुरू हुआ था। अब 23 नवंबर को जस्टिस सूर्यकांत नए CJI के रूप में पदभार संभालेंगे।
“हर पद सत्ता नहीं, सेवा का अवसर”— गवई
अपने फेयरवेल स्पीच में गवई ने कहा, “मैं हमेशा मानता हूं कि हर पद सत्ता का पद नहीं होता, बल्कि राष्ट्र की सेवा का अवसर होता है।” उन्होंने बताया कि डॉक्टर बी.आर. अंबेडकर और उनके पिता ने उनके न्याय-दृष्टिकोण को गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि वे हमेशा मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक सिद्धांतों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करते रहे।
“बार को हमेशा गुरु माना”
गवई ने अपने संबोधन में कहा कि न्यायाधीश और वकील, दोनों ही इस पेशे के मूल सिद्धांतों से बंधे होते हैं। “मैंने हमेशा बार को अपना गुरु माना है,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह अपने योगदान से पूरी तरह संतुष्ट होकर यह पद छोड़ रहे हैं।



