वंदे मातरम् 150 साल, योगी आदित्यनाथ के शब्दों में राष्ट्रभक्ति की अमर गूंज!
वंदे मातरम् के 150 साल पूरे, योगी आदित्यनाथ ने दी राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा, हर भारतीय के दिल में गूंजती है इसकी अमर शक्ति।

भारत का इतिहास उस गीत से ओत-प्रोत है जिसने हर भारतीय के हृदय में आज़ादी की ज्वाला जलाई “वंदे मातरम्”। योगी आदित्यनाथ ने इस गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि “वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, यह भारत की आत्मा की आवाज़ है।” यह गीत हर युग में देशभक्ति, साहस और एकता का प्रतीक बना हुआ है।
योगी आदित्यनाथ का संदेश : वंदे मातरम् राष्ट्र की चेतना का प्रतीक
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने लोक भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में कहा कि “वंदे मातरम्” ने हर भारतीय को राष्ट्र के प्रति समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का भाव दिया है। यह गीत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1875 में रचा गया था और आज भी यह हर भारतीय की जुबान पर उतनी ही श्रद्धा के साथ गूंजता है। उन्होंने कहा कि “वंदे मातरम्” ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान सामूहिक जागरूकता और एकजुटता का ऐसा भाव जगाया जिसने विदेशी शासन की नींव हिला दी।
एक गीत जिसने क्रांति की ज्वाला जगाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि “वंदे मातरम्” का पहला गायन कैप्टन पं. पं. चट्टोपाध्याय जी के उस ऐतिहासिक कार्यक्रम में हुआ था जब बंगाल की जनता अंग्रेजों के अत्याचारों से जूझ रही थी। इस गीत ने उस समय के हर नौजवान, किसान, मजदूर, विद्यार्थी और स्त्री को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा — “यह गीत केवल स्वाधीनता का आह्वान नहीं था, यह राष्ट्र की आत्मा का उद्घोष था।”
‘वंदे मातरम्’ का संदेश : कर्तव्य पहले
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने कहा कि “वंदे मातरम्” हमें सिखाता है कि अधिकारों से पहले कर्तव्यों का पालन जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जो प्रगति और विकास की नई ऊँचाइयाँ हासिल हुई हैं, वे नागरिकों की कर्तव्यनिष्ठा और एकजुट प्रयासों का परिणाम हैं। आज जब हर नागरिक अपने दायित्वों का ईमानदारी से पालन करता है, तभी देश “वंदे मातरम्” के वास्तविक अर्थ को जीता है।
‘वंदे मातरम्’ : एकता और संस्कृति का प्रतीक
यह गीत किसी जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र से ऊपर उठकर सम्पूर्ण भारत की एकता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने संस्कृत और बांग्ला भाषा की मिठास में इस गीत को गढ़कर भारतीय भावना को सशक्त रूप दिया।उन्होंने बताया कि “वंदे मातरम्” वह स्वर है जिसने विदेशी सत्ता को यह एहसास दिलाया कि भारत केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि एक जीवंत संस्कृति है।
राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा और आज का भारत
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आज जब भारत वैश्विक मंच पर नई ऊँचाइयाँ छू रहा है, तब भी “वंदे मातरम्” का संदेश उतना ही प्रासंगिक है। यह गीत हमें स्मरण कराता है कि स्वतंत्रता केवल अधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है। हर किसान, शिक्षक, श्रमिक, और नागरिक जब अपने कार्य को देश के लिए समर्पित करता है, तो वह “वंदे मातरम्” की भावना को साकार करता है।
योगी आदित्यनाथ का आह्वान : नई पीढ़ी तक पहुँचाएँ ‘वंदे मातरम्’ का संदेश
आदित्यनाथ ने युवाओं से कहा कि वे इस गीत की भावना को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
उन्होंने कहा —“वंदे मातरम् केवल इतिहास नहीं, यह हर भारतीय के दिल की धड़कन है। जब हम अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं, तो वास्तव में हम वंदे मातरम् का ही गायन कर रहे होते हैं।” कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्य सचिव, वरिष्ठ अधिकारी और अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
“वंदे मातरम्” केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के आत्मसम्मान और स्वाभिमान की जीवंत प्रतीक है। 150 वर्षों से यह गीत हर भारतीय को यह याद दिलाता आया है कि देश सबसे ऊपर है। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ द्वारा व्यक्त विचारों ने इस ऐतिहासिक गीत की भावना को और सशक्त किया है ,वंदे मातरम् अब भी वही ऊर्जा, वही उत्साह और वही प्रेरणा देता है, जो 150 वर्ष पहले देता था।



