प्रयागराज मेला प्रशासन और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बीच टकराव, नोटिस–जवाबी नोटिस तक मामला पहुंचा

मेला प्रशासन ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से 24 घंटे में शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा मौनी अमावस्या स्नान को लेकर पुलिस कार्रवाई और प्रोटोकॉल पर गहराया विवाद तीसरे दिन भी जारी धरना, माफी और ससम्मान संगम स्नान की मांग पर अड़े शंकराचार्य

Uttar Pradesh: प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी करते हुए 24 घंटे के भीतर यह प्रमाण देने को कहा है कि वे वास्तव में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य हैं। मेला प्रशासन का कहना है कि जब तक इसका प्रमाण नहीं दिया जाता, तब तक उन्हें शंकराचार्य का प्रोटोकॉल नहीं दिया जा सकता। वहीं, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी मेला प्रशासन को नोटिस भेजने की बात कही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद अधिकारियों ने अपने नाम के आगे शंकराचार्य शब्द का गलत इस्तेमाल किया है।

 

मौनी अमावस्या स्नान से शुरू हुआ विवाद

पूरा विवाद मौनी अमावस्या के दिन संगम स्नान को लेकर शुरू हुआ। आरोप है कि मेला प्रशासन ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को संगम में स्नान करने से रोक दिया और उन्हें बिना स्नान कराए ही उनके शिविर में वापस भेज दिया गया। इस दौरान उनके शिष्यों के साथ पुलिस द्वारा मारपीट और अभद्रता किए जाने के आरोप भी लगे हैं। सोमवार को शंकराचार्य ने मीडिया के सामने उन शिष्यों को पेश किया, जिनके साथ कथित तौर पर पुलिस ने ज्यादती की थी। शिष्यों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें पीटा, बाल पकड़कर घसीटा और अपमानित किया।

 

मुख्यमंत्री पर लगाए गंभीर आरोप

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के इशारे पर उनके साथ अभद्रता की गई और उन्हें संगम स्नान से रोका गया। उनका दावा है कि उनकी हत्या का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि अगर वे अपने रथ से नीचे उतर जाते, तो उनकी जान जा सकती थी। शंकराचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि सादे कपड़ों में आए पुलिसकर्मियों ने उनका अपहरण करने की कोशिश की, उन्हें करीब पांच घंटे तक अज्ञात स्थान पर रखा गया और फिर शाम को उनके शिविर के बाहर छोड़ दिया गया।

 

मेला प्रशासन ने आरोपों को बताया बेबुनियाद

मेला प्रशासन ने शंकराचार्य के सभी आरोपों को खारिज किया है। प्रशासन का कहना है कि अविमुक्तेश्वरानंद ज्योतिषपीठ के मान्य शंकराचार्य नहीं हैं, इसलिए उन्हें शंकराचार्य से जुड़ा कोई प्रोटोकॉल नहीं दिया गया। इसी आधार पर उनसे उनके शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा गया है। मेला प्रशासन की ओर से जारी नोटिस के जवाब में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने दोपहर तीन बजे प्रेस वार्ता बुलाने की घोषणा की है।

 

तीसरे दिन भी जारी रहा धरना

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। माघ मेले के त्रिवेणी मार्ग पर वे अपने शिविर के सामने फुटपाथ पर बैठे हुए हैं। उनके समर्थन में बड़ी संख्या में साधु-संतों के साथ-साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी पहुंच रहे हैं। शंकराचार्य मेला प्रशासन से सार्वजनिक माफी की मांग पर अड़े हैं। उन्होंने साफ कहा है कि जब तक उन्हें ससम्मान संगम में स्नान कराकर शिविर में प्रवेश नहीं कराया जाता, तब तक वे शिविर में कदम नहीं रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वे अगले साल भी मेला आएंगे और इसी तरह फुटपाथ पर बैठकर विरोध दर्ज कराएंगे।

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