पीएमओ अब “सेवा तीर्थ” के नाम से
पीएमओ का नया नाम अब सेवा तीर्थ, ओपन फ्लोर डिज़ाइन और तेज़ समन्वय के लिए। सेवा तीर्थ में PMO, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय एक ही परिसर में। पुरानी नॉर्थ और साउथ ब्लॉक अब पब्लिक म्यूज़ियम और संग्रहालय में बदलेंगे।

मकर संक्रांति के दिन से प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का पता बदल गया है और इसका नाम भी अब “सेवा तीर्थ” रखा गया है। नया ऑफिस ओपन फ्लोर डिज़ाइन पर बना है। यानी अब बंद केबिन नहीं, बल्कि अधिकारी एक साथ बैठकर काम करेंगे। इसका मकसद सहयोग और तेज़ समन्वय को बढ़ाना है और पुरानी इमारत की औपचारिकताओं को कम करना है।
सेवा तीर्थ की खासियत
सेवा तीर्थ को आधुनिक तकनीक और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। इसमें एन्क्रिप्टेड संचार प्रणाली, उन्नत साइबर सुरक्षा नेटवर्क और एकीकृत सुरक्षा वास्तुकला शामिल हैं। साथ ही, यह इमारत भूकंप प्रतिरोधी है और किसी भी परिस्थितियों में काम करने के लिए डिज़ाइन की गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय के भीतर अब “इंडिया हाउस” नाम की एक आधुनिक कॉन्फ्रेंस सुविधा है। यह सुविधा उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठकों, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और प्रेस मीट के लिए बनाई गई है। इससे पहले PMO में ऐसी कोई समर्पित जगह नहीं थी, जिसके लिए अलग-अलग जगहों पर व्यवस्थाएं करनी पड़ती थीं।
सेवा तीर्थ में कौन-कौन है
सेवा तीर्थ सिर्फ PMO का नया पता नहीं है। यह सरकार के उच्चतम कार्यालयों को एक ही परिसर में लाता है, जिससे समन्वय और निर्णय प्रक्रिया तेज़ होगी। सेवा तीर्थ वन: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), सेवा तीर्थ टू: कैबिनेट सचिवालय, सेवा तीर्थ थ्री: राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय, इस तरह, अलग-अलग जगहों पर फैले कार्यालय अब एक ही परिसर में होंगे। इस परियोजना की कुल लागत लगभग 1,200 करोड़ रुपये है।
पुरानी इमारत का भविष्य
PMO साउथ ब्लॉक पूरी तरह खाली होने के बाद, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को सार्वजनिक म्यूज़ियम और संग्रहालय में बदल दिया जाएगा।



