चीनी तकनीक अटकी, रिलायंस का लिथियम-आयन बैटरी सेल प्लान रुका

चीनी तकनीक न मिलने से रिलायंस का बैटरी सेल प्रोडक्शन फिलहाल रुका कंपनी ने दी सफाई, बैटरी स्टोरेज मैन्युफैक्चरिंग प्लान बरकरार ग्रीन एनर्जी मिशन में चीन की सख्ती से बढ़ी चुनौती

Buisness news: रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) को भारत में लिथियम-आयन बैटरी सेल बनाने की योजना पर फिलहाल ब्रेक लगाना पड़ा है। वजह है चीनी तकनीक हासिल न हो पाना। द इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली यह कंपनी इस साल ही सेल मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने की तैयारी में थी, लेकिन चीन की सख्त तकनीक ट्रांसफर नीति के कारण यह प्लान अटक गया। इस खबर का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला। सोमवार को शुरुआती कारोबार में रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर 1 प्रतिशत से ज्यादा गिर गए।

 

चीनी कंपनी से बातचीत फेल

रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस चीन की कंपनी शियामेन हिथियम एनर्जी स्टोरेज टेक्नोलॉजी से बैटरी सेल तकनीक का लाइसेंस लेने की कोशिश कर रही थी। हालांकि, बीजिंग सरकार ने विदेशी कंपनियों को तकनीक देने पर सख्ती बढ़ा दी है, जिसके चलते यह सौदा आगे नहीं बढ़ सका। अब रिलायंस ने रणनीति में बदलाव करते हुए बैटरी सेल बनाने के बजाय बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की असेंबली पर फोकस करने का फैसला किया है। ये सिस्टम कंपनी के रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल होंगे।

 

रिलायंस ने क्या कहा?

इस पूरे मामले पर रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सफाई दी है। कंपनी ने सोमवार को बयान जारी कर कहा कि उनकी बैटरी स्टोरेज मैन्युफैक्चरिंग की योजनाओं में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यह बयान ब्लूमबर्ग की उस रिपोर्ट के जवाब में आया, जिसमें कहा गया था कि कंपनी ने बैटरी सेल उत्पादन रोक दिया है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, “सेल से लेकर कंटेनराइज्ड एनर्जी स्टोरेज सिस्टम तक विश्वस्तरीय बैटरी मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनाने की हमारी योजना पूरी तरह कायम है और तय समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ रही है।”

 

चीन की सख्ती से बढ़ी मुश्किलें

चीन ने क्लीन एनर्जी और बैटरी से जुड़ी तकनीकों को लेकर निगरानी और कड़ी कर दी है, ताकि वैश्विक स्तर पर अपनी बढ़त बनाए रख सके। इसका असर भारत की कई कंपनियों पर पड़ रहा है, जो स्थानीय स्तर पर बैटरी उत्पादन शुरू करना चाहती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चीनी तकनीक के बिना बैटरी सेल बनाना महंगा और जोखिम भरा साबित हो सकता है। जापान, यूरोप और दक्षिण कोरिया की तकनीकें लागत के लिहाज से काफी महंगी हैं और बड़े पैमाने पर भारत में उतनी प्रतिस्पर्धी नहीं मानी जातीं।

 

गिगा फैक्ट्री प्लान पर असर

मुकेश अंबानी ने अगस्त 2025 में शेयरधारकों को बताया था कि रिलायंस की बैटरी गिगा फैक्ट्री 2026 से शुरू होगी। सेल उत्पादन में देरी से फिलहाल कंपनी की कमाई पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि रिलायंस का मुख्य रेवेन्यू ऑयल, रिटेल और टेलीकॉम से आता है। लेकिन यह अंबानी के ग्रीन एनर्जी विजन के लिए एक चुनौती जरूर है।

 

पूरे सेक्टर पर दिख रहा असर

रिलायंस ही नहीं, बल्कि अडानी ग्रुप और जेएसडब्ल्यू ग्रुप जैसी कई भारतीय कंपनियां भी अब बैटरी सेल बनाने के बजाय बैटरी पैक और स्टोरेज सिस्टम असेंबली पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। तकनीक और लागत दोनों ही इस सेक्टर की सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

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