एसटीएफ आलोक के जाल में उलझा कफ सिरप रैकेट: पूर्वांचल से पश्चिम तक फैला नेटवर्क

यूपी में कोडीन कफ सिरप तस्करी के सबसे बड़े नेटवर्क का खुलासा रैकेट की पहुंच पूर्वांचल से पश्चिमी यूपी तक फैलने के सुराग एसआईटी ट्रांसपोर्टरों, फर्मों और वित्तीय लेनदेन की गहराई से जांच में जुटी

उत्तर प्रदेश में कोडीनयुक्त कफ सिरप तस्करी के बड़े रैकेट के खुलासे के बाद एक नाम फिर सुर्खियों में है—आलोक प्रताप सिंह उर्फ एसटीएफ आलोक। पुलिस विभाग से बर्खास्त यह सिपाही अब राज्य के सबसे बड़े ड्रग नेटवर्क का अहम चेहरा माना जा रहा है। चंदौली जिले के कैथी गांव का रहने वाला आलोक सातवीं तक की पढ़ाई के बाद पिता के साथ लखनऊ आ गया था। यहीं से उसने पुलिस नौकरी की शुरुआत की, लेकिन समय के साथ उसने वर्दी की जानकारी का इस्तेमाल अपराध जगत में अपने नेटवर्क को मजबूत करने के लिए किया।

 

एसटीएफ आलोक कैसे बना?

पूर्व सांसद धनंजय सिंह से करीबी रिश्तों ने उसे सिस्टम और अपराध, दोनों में पकड़ दिलाई। चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर और वाराणसी तक उसने युवाओं का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया, जो रियल एस्टेट, रेलवे ठेके और खनन से लेकर अब कफ सिरप तस्करी तक में सक्रिय रहा। लखनऊ, जौनपुर और वाराणसी में उसकी अच्छी पकड़ के कारण पुलिस के लिए उसे पकड़ना लंबे समय तक चुनौती बना रहा। बाद में गाजियाबाद और मेरठ के सयरगनों से कनेक्शन जोड़कर उसने यह रैकेट पश्चिमी यूपी तक फैला दिया।

 

आर्थिक जांच ने मचाई खलबली

जौनपुर एसआईटी ने दो दिनों में शुभम जायसवाल समेत 7 फर्म संचालकों के 16 बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि सिर्फ एक मेडिकल स्टोर से 17,000 शीशी कफ सिरप की बिक्री 2023 से अब तक दर्ज है—जो खुद में बड़ा सवाल है।

 

भदोही और आजमगढ़ में भी कार्रवाई तेज

भदोही में भी कफ सिरप की अवैध खरीद–बिक्री पर एसआईटी गठित कर दी गई है। CO क्राइम राजीव सिंह की टीम सिर्फ एक हफ्ते में 5 कारोबारियों से करीब 10 करोड़ रुपये का कफ सिरप जब्त कर चुकी है। छह फर्मों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। आजमगढ़ में तीन मेडिकल स्टोर संचालकों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं। जांच में पाया गया कि वे हापुड़ से सिरप मंगाकर बेच रहे थे। उधर, मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के पिता भोला प्रसाद को कोलकाता से गिरफ्तार कर 15 घंटे में 800 किमी की यात्रा तय करके सोनभद्र लाया गया है।

 

एसआईटी की जांच और गहराई तक

अब जांच टीम ट्रांसपोर्टरों, फर्म संचालकों और पूरे वित्तीय नेटवर्क की लेयर दर लेयर जांच कर रही है। यह मामला यूपी में सक्रिय एक बड़े औषधि तस्करी नेटवर्क को सामने ला रहा है, जिसने अपराध और प्रशासन—दोनों को चुनौती दी है।

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