एडमिट कार्ड विवाद पर शिक्षा मंत्री घिरे, AAP ने सरकार पर स्कूलों को संरक्षण देने का लगाया आरोप

10वीं बोर्ड परीक्षा से पहले एडमिट कार्ड रोकने का मामला गरमाया। AAP ने शिक्षा मंत्री और स्कूल प्रबंधन के रिश्तों पर उठाए सवाल। फीस विवाद के बीच बच्चों के मानसिक उत्पीड़न का आरोप।

नई दिल्ली, 17 फरवरी 2026, आम आदमी पार्टी ने बच्चों के एडमिट कार्ड रोकने के मामले में शिक्षा मंत्री आशीष सूद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। “आप” के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि एपीजे स्कूल के प्रिंसिपल और मैनेजर सोमवार देर रात तक शिक्षा मंत्री के घर में बैठे मिले, जबकि उसी दिन पार्टी स्कूल के बाहर धरना दे रही थी। उन्होंने सवाल उठाया कि बच्चों को एडमिट कार्ड देने का काम स्कूल का है, फिर प्रिंसिपल एडमिट कार्ड लेकर मंत्री के घर क्यों बैठे थे? भारद्वाज ने कहा कि अगर मंत्री सच में 18 लाख बच्चों के अभिभावक हैं तो उन्हें एडमिट कार्ड रोकने पर स्कूल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करानी चाहिए थी।

 

एपीजे स्कूल और मंत्री के रिश्ते पर सवाल

मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में विधायक संजीव झा और कुलदीप कुमार के साथ प्रेस वार्ता करते हुए सौरभ भारद्वाज ने पूछा कि आखिर शिक्षा मंत्री और एपीजे स्कूल प्रबंधन के बीच क्या संबंध है। उन्होंने कहा कि जिस स्कूल के खिलाफ दिनभर प्रदर्शन हुआ, उसी स्कूल का प्रिंसिपल मंत्री के घर पर मौजूद मिला। यह संयोग नहीं हो सकता।

 

फीस विवाद और एडमिट कार्ड का संकट

भारद्वाज ने बताया कि 10वीं बोर्ड परीक्षा से ठीक पहले स्कूल ने अभिभावकों से कथित तौर पर बढ़ी हुई फीस मांगी और कहा कि फीस नहीं देने पर एडमिट कार्ड जारी नहीं होंगे। उनका आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में भी अभिभावकों को ब्लैकमेल किया गया। उन्होंने कहा कि परीक्षा से ठीक पहले एडमिट कार्ड रोकना बच्चों के साथ मानसिक उत्पीड़न है।

 

डीपीएस द्वारका का उदाहरण

सौरभ भारद्वाज ने DPS Dwarka का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी फीस विवाद में बच्चों को कक्षा में बैठने नहीं दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट के आदेश के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई। विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के जवाब में भी सरकार ने स्वीकार किया कि कोई कार्रवाई नहीं की गई।

 

जुवेनाइल जस्टिस एक्ट का हवाला

“आप” नेताओं ने कहा कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 के तहत बच्चों को मानसिक या शारीरिक पीड़ा पहुंचाना दंडनीय अपराध है। परीक्षा से पहले एडमिट कार्ड रोकना भी इसी श्रेणी में आता है। उन्होंने पूछा कि जब स्पष्ट कानूनी प्रावधान है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

 

‘ऊपर वाले’ के इशारे का दावा

बुराड़ी से विधायक संजीव झा ने कहा कि जब वे स्कूल पहुंचे तो प्रिंसिपल ने कहा कि “ऊपर” से निर्देश आने पर ही एडमिट कार्ड जारी होंगे। बाद में मंत्री के साथ उनकी तस्वीर सामने आने के बाद उन्हें समझ आया कि यह ‘ऊपर’ कौन था। उनका आरोप है कि स्कूल और सरकार दोनों इस मामले में बराबर के जिम्मेदार हैं।

 

सरकार पर संरक्षण देने का आरोप

कोंडली से विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि पार्टी सुबह 11 बजे से रात 11 बजे तक स्कूल के बाहर डटी रही और अंततः बच्चों को एडमिट कार्ड दिलाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार निजी स्कूलों को संरक्षण दे रही है, जिसकी वजह से अभिभावकों और बच्चों को मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ रही है। पार्टी ने चेतावनी दी कि अगर भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई गईं तो वह आंदोलन और तेज करेगी।

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