ईरान की ज़मीन के नीचे छिपी ताकत: क्यों अमेरिका-इज़रायल भी नहीं कर पा रहे मिसाइल सिस्टम को तबाह
ईरान की मिसाइलें जमीन के 400 मीटर से ज्यादा नीचे छिपी अमेरिका के सबसे ताकतवर बम भी नहीं कर पा रहे असर भविष्य के युद्ध में ‘अंडरग्राउंड वॉरफेयर’ बनेगा गेमचेंजर

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा दावा सामने आया है, जो इस संभावित युद्ध की तस्वीर को पूरी तरह बदल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों को इतनी गहराई और मजबूती से भूमिगत ठिकानों में छिपा रखा है कि दुनिया की कोई भी मौजूदा सैन्य ताकत उन्हें पूरी तरह नष्ट नहीं कर सकती।
B-52 भी बेबस, सिर्फ 200 फीट तक ही असर
अमेरिका के ताकतवर B-52 बॉम्बर्स को बंकर बस्टर हमलों के लिए जाना जाता है, लेकिन इनकी भी एक सीमा है। ये विमान करीब 60 मीटर यानी लगभग 200 फीट गहराई तक ही लक्ष्य को भेद सकते हैं। वहीं, ईरान ने अपनी मिसाइलों को करीब 440 मीटर (1444 फीट) की गहराई में छिपा रखा है, जो इन हमलों की पहुंच से काफी दूर है।
ग्रेनाइट की चट्टानों के नीचे बना ‘मिसाइल शहर’
ईरान ने अपनी मिसाइलों को साधारण बंकर में नहीं, बल्कि बेहद कठोर ग्रेनाइट चट्टानों के नीचे सुरक्षित किया है। इन चट्टानों की मोटाई इतनी ज्यादा है कि इसे “ग्रेनाइट डेड ज़ोन” कहा जा रहा है। इसी के अंदर ईरान ने एक पूरा “मिसाइल सिटी” तैयार किया है, जिसमें सुरंगें, स्टोरेज एरिया और लॉन्चिंग सिस्टम जुड़े हुए हैं।
चलते-फिरते लॉन्चर, दुश्मन के लिए मुश्किल निशाना
इस भूमिगत नेटवर्क की खास बात यह है कि इसमें सबवे जैसी प्रणाली मौजूद है। इसके जरिए मिसाइलों और लॉन्चरों को तेजी से एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट किया जा सकता है। अगर दुश्मन किसी एक लॉन्च साइट को ट्रैक भी कर ले, तो मिसाइलों को तुरंत दूसरी जगह पहुंचा दिया जाता है, जिससे उन्हें निशाना बनाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
सबसे भारी बम भी पड़ रहे कमजोर
अमेरिका का सबसे शक्तिशाली बंकर बस्टर बम GBU-57 MOP भी इतनी गहराई तक असरदार नहीं है। यह बम आमतौर पर 60 मीटर मिट्टी या करीब 18 मीटर कंक्रीट को ही भेद सकता है, जबकि ईरान की मिसाइलें इससे कई गुना ज्यादा गहराई और मजबूत चट्टानों के नीचे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इतनी मजबूत सुरक्षा को तोड़ने के लिए परमाणु स्तर की ताकत की जरूरत पड़ सकती है।
सुरंगों से निकलती हैं मिसाइलें, सतह पर ही होते हैं हमले
ईरान की रणनीति साफ है—मिसाइलों को जमीन के नीचे सुरक्षित रखो और जरूरत पड़ने पर ही सतह पर लाकर लॉन्च करो। यही वजह है कि अमेरिका और इज़रायल अब तक सिर्फ सतह पर मौजूद लॉन्चरों को ही निशाना बना पा रहे हैं, जबकि असली भंडार सुरक्षित बना हुआ है।
भविष्य के युद्ध की बदलती रणनीति
ईरान का यह मॉडल दिखाता है कि आने वाले समय में युद्ध सिर्फ जमीन या आसमान में नहीं, बल्कि जमीन के नीचे भी लड़े जाएंगे। गहरी भूमिगत किलेबंदी अब किसी भी देश की सबसे बड़ी सैन्य ताकत बन सकती है।



