ईरानी युद्धपोत IRIS डेना को अमेरिका ने टॉरपीडो से डुबोया, विदेश मंत्री की चेतावनी- अमेरिका को होगा पछतावा

अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत IRIS डेना को टॉरपीडो से डुबोया, बड़ा नौसैनिक हमला। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की चेतावनी- अमेरिका को इस कार्रवाई का होगा पछतावा। श्रीलंका के पास हुए हमले में कई नाविकों की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी।

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक बड़ी नौसैनिक घटना सामने आई है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को टॉरपीडो से डुबो दिया। उनका कहना है कि यह हमला ईरान के तट से करीब 2000 मील दूर समुद्र में किया गया और इसे उन्होंने “क्रूरता” करार दिया है। अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिकी हमले में सवार नाविकों की जान गई है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका ने जो मिसाल बनाई है, उसका उसे आने वाले समय में कड़ा पछतावा हो सकता है।

 

अमेरिका ने हमले की पुष्टि की

अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने पेंटागन में ब्रीफिंग के दौरान ईरानी फ्रिगेट के डूबने की पुष्टि की। उन्होंने इसे “quiet death” यानी शांत मौत बताया। उनके मुताबिक, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब अमेरिकी पनडुब्बी ने दुश्मन के जहाज पर टॉरपीडो से हमला किया है। बताया जा रहा है कि IRIS Dena ईरान की नौसेना का आधुनिक युद्धपोत था, जो सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, एंटी-शिप मिसाइल और टॉरपीडो से लैस था। यह जहाज भारतीय नौसेना के बहुपक्षीय अभ्यास MILAN 2026 और इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में भाग लेने के बाद विशाखापत्तनम से ईरान लौट रहा था।

 

श्रीलंका के पास हुआ हमला

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी नौसेना की एक पनडुब्बी ने भारतीय महासागर में Sri Lanka के दक्षिणी तट से करीब 40 नॉटिकल मील दूर मार्क-48 टॉरपीडो से हमला किया। उस समय जहाज पर करीब 180 नाविक सवार थे।

 

रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

घटना के बाद Sri Lanka Navy ने बचाव अभियान चलाया। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक 87 शव बरामद किए गए हैं, जबकि 32 नाविकों को बचा लिया गया। वहीं 60 से ज्यादा नाविक अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। अमेरिका ने इस कार्रवाई को अपने सैन्य अभियान “Operation Epic Fury” का हिस्सा बताया है, जिसे 28 फरवरी 2026 से इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ चलाया जा रहा है। इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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