महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव में बड़ा बदलाव: कई जगहों पर वोटिंग 20 दिसंबर को
महाराष्ट्र के कई नगर निगम चुनाव टाले गए। कुछ जिलों में वोटिंग अब 20 दिसंबर को होगी। SEC ने प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों के कारण फैसला लिया।


महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में बड़ा फेरबदल हो गया है। राज्य के करीब 25 नगर निगमों में वोटिंग अब 20 दिसंबर को होगी। इसके पीछे वजह है चुनाव प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियाँ और उम्मीदवारों की अपील से जुड़ी समस्याएँ। बाकी नगर परिषद और नगर पंचायतों में चुनाव तय कार्यक्रम के मुताबिक 2 दिसंबर को सुबह 7:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक होंगे, और नतीजे 3 दिसंबर को सुबह 10 बजे के बाद घोषित किए जाएंगे।
पूरा मामला क्या है?
स्टेट इलेक्शन कमीशन (SEC) ने कई जिलों में चल रहे नगर निगम चुनावों को रोक दिया और वोटिंग की तारीख आगे बढ़ा दी। इस फैसले से उम्मीदवार और पार्टियां चौंक गईं, क्योंकि चुनाव प्रचार अपने आखिरी और हाई-इंटेंसिटी दौर में था। SEC के मुताबिक रोक उन नगर निगमों और परिषदों में लगी है जहां अपील और कैंडिडेट लिस्ट प्रोसेस में गड़बड़ियां हुईं। प्रभावित इलाकों में ठाणे (अंबरनाथ), बारामती, अमरावती, नांदेड़, सोलापुर, पुणे, यवतमाल और कई अन्य जिले शामिल हैं।
देरी की वजह
कुछ उम्मीदवारों के नॉमिनेशन पेपर रिजेक्ट होने के बाद उनकी अपील सही समय पर निपटाई नहीं गई। महाराष्ट्र म्युनिसिपल इलेक्शन रूल्स, 1966 के अनुसार अपीलों का निपटारा 22 नवंबर तक होना चाहिए था। इससे उम्मीदवारों को नाम वापस लेने और सिंबल अलॉटमेंट के लिए समय मिल जाता।
लेकिन कई जगहों पर:
अपील के फैसले फाइनल होने से पहले सिंबल बांट दिए गए, कुछ अपील देर से मिलीं, कई मामलों में अपील अभी भी पेंडिंग थीं। इन गड़बड़ियों को SEC ने गंभीर और कानूनी उल्लंघन माना और 29 नवंबर को आदेश दिया कि प्रभावित वार्डों में चुनाव प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए।
नई इलेक्शन टाइमलाइन
10 दिसंबर – नाम वापसी की आखिरी तारीख, 11 दिसंबर – फाइनल लिस्ट और सिंबल अलॉटमेंट, 20 दिसंबर – वोटिंग (सुबह 7:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक), 21 दिसंबर – काउंटिंग, 23 दिसंबर – ऑफिशियल रिजल्ट
मुख्यमंत्री फडणवीस की नाराजगी
करीब 25 नगर निगम चुनाव टालने पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चुनाव आयोग की आलोचना की। उन्होंने कहा, “वोटिंग से ठीक एक दिन पहले चुनाव टालना पूरी तरह गलत है। आयोग ने नियमों को गलत तरीके से समझा। उम्मीदवारों की मेहनत बर्बाद हो गई।” हालांकि उन्होंने कहा कि अब आदेश का पालन किया जाएगा, लेकिन राज्य सरकार चुनाव आयोग को रिप्रेजेंटेशन देगी।



