“माय लॉर्ड.. कैमरा बंद करना भूल गए?” रिकॉर्ड हुआ अश्लील कांड, भयंकर वायरल.. वर्चुअल कोर्ट में ‘लाइव ड्रामा’!

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कथित तौर पर एक लाइव कोर्ट प्रोसीडिंग के दौरान एक व्यक्ति, जिसे जज बताया जा रहा है, एक महिला के साथ कैमरे के सामने अशोभनीय हरकतें करते नजर आ रहा है।
वीडियो में दिख रहा दृश्य कथित रूप से एक ऑनलाइन कोर्ट सेशन का है। दावा किया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति कैमरा बंद समझकर ऑन-स्क्रीन अनुचित व्यवहार करने लगे।
हालांकि, अब तक इस वीडियो की तारीख, स्थान या पहचान की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सोशल मीडिया पर वायरल दावे — “जज भूल गए कि कैमरा ऑन है”
वीडियो के साथ कई यूजर्स यह दावा कर रहे हैं कि यह घटना एक भारतीय अदालत की वर्चुअल सुनवाई के दौरान की है।
कुछ यूजर्स का कहना है कि “जज साहब भूल गए कि कैमरा ऑन है और ब्रेक के दौरान यह घटना कैमरे में रिकॉर्ड हो गई।”
वहीं, कुछ अन्य लोगों ने इस वीडियो को ‘न्याय व्यवस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला’ बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।
इस वीडियो को अब तक लाखों बार शेयर और रीपोस्ट किया जा चुका है।
Welcome to Digital India Justice 😂
Court is online… but judge forgot it’s LIVE! ☠️
When tech meets tradition
— and the camera off button loses the case! 🤣 pic.twitter.com/1GbfOFQ6w7— ShoneeKapoor (@ShoneeKapoor) October 15, 2025
Grok (X का AI टूल) ने कहा—“यह असली फुटेज लग रहा है, AI जनरेटेड नहीं”
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) पर एलन मस्क के AI टूल ‘Grok’ ने इस वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया दी है।
Grok ने अपने विश्लेषण में लिखा—
“यह भारतीय वर्चुअल कोर्ट की वास्तविक फुटेज प्रतीत होती है, जहां एक मानव त्रुटि के कारण कैमरा बंद नहीं हुआ। इसमें किसी तरह की AI मैनिपुलेशन के संकेत नहीं दिखते।”
Grok का यह विश्लेषण वायरल होते ही कई लोग इसे ‘AI आधारित प्रमाण’ मानने लगे, हालांकि कोई आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।
यूजर्स के अलग-अलग दावे — “AI जनरेटेड है” से लेकर “वह जज नहीं, एडवोकेट हैं” तक
सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर लोगों के बीच अलग-अलग थ्योरीज चल रही हैं —
कुछ लोग इसे फेक बताते हुए कह रहे हैं कि “यह वीडियो AI जनरेटेड डीपफेक है।”
“No Hon’ble Judge can do this even if proven otherwise. They are beyond truth!” – ऐसा कई यूजर्स ने लिखा।
दूसरा पक्ष दावा कर रहा है कि “वीडियो में दिख रहा व्यक्ति जज नहीं बल्कि एक एडवोकेट (वकील) है।”
वहीं कुछ ने लिखा कि यह “दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस ज्योति सिंह की कोर्ट का स्क्रीन है, और कोर्ट उस वक्त सेशन में नहीं थी।”
इनमें से किसी भी दावे की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
अगर वीडियो असली है तो गंभीर मामला, अगर फेक है तो और भी खतरनाक
इस वीडियो की सच्चाई चाहे जो हो, यह मामला अब न्यायपालिका की गरिमा और डिजिटल नैतिकता दोनों से जुड़ गया है।
अगर वीडियो असली है, तो यह न्यायिक संस्थानों की प्रतिष्ठा पर गहरा सवाल है;
वहीं अगर यह फेक या AI-जनरेटेड डीपफेक है, तो यह देश की अदालतों की छवि को धूमिल करने वाला गंभीर अपराध है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में डिजिटल फॉरेंसिक जांच जरूरी है ताकि यह तय किया जा सके कि वीडियो वास्तविक है या एडिटेड।
फैक्ट चेक और आधिकारिक जांच की मांग
कई वकीलों, पत्रकारों और साइबर विशेषज्ञों ने इस वीडियो की सत्यता की जांच के लिए न्याय मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट की इंटरनल कमेटी से हस्तक्षेप की मांग की है।
उन्होंने कहा कि अगर यह वीडियो AI से बनाया गया है, तो यह आईटी एक्ट और डीपफेक कानूनों के तहत दंडनीय अपराध है।
वहीं, अगर यह वीडियो असली निकलता है, तो यह न्यायिक मर्यादा का गंभीर उल्लंघन होगा।
सत्यापन से पहले शेयर न करें वीडियो
फिलहाल इस वीडियो को लेकर किसी भी तरह की पुष्टि नहीं हुई है।
पत्रकारीय जिम्मेदारी के तहत यह स्पष्ट है कि बिना आधिकारिक जांच के किसी भी दावे को सत्य या असत्य घोषित करना जल्दबाजी होगी।
सोशल मीडिया यूजर्स से अपील है कि वे इस तरह के वीडियो को शेयर या फॉरवर्ड करने से बचें, जब तक इसकी फैक्ट-चेक रिपोर्ट सामने न आ जाए।



