ग्रेटर नोएडा की फैक्ट्री पहुंचीं डीएम मेधा रूपम, सीट बेल्ट बनाने वाले मजदूरों का बढ़ाया हौसला
गौतमबुद्धनगर में प्रशासन एक बार फिर मजदूरों की सुरक्षा और उनकी सहूलियत को लेकर काफी गंभीर नजर आ रहा है। कामगारों से बातचीत के दौरान डीएम मेधा रूपम ने उनकी समस्याओं को भी करीब से सुना।

Noida news: गौतमबुद्धनगर में प्रशासन एक बार फिर मजदूरों की सुरक्षा और उनकी सहूलियत को लेकर काफी गंभीर नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी मेधा रूपम खुद ग्राउंड जीरो पर उतरीं और ग्रेटर नोएडा की जेबीजे टेक्नोलॉजी लिमिटेड कंपनी का जायजा लिया। वहां उन्होंने ऑटोमोबाइल पार्ट्स, खासकर गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली सीट बेल्ट बनाने के काम को बहुत बारीकी से देखा और पूरी प्रक्रिया को समझा।
सुरक्षा कवच बनाने वाले हाथों की थपथपाई पीठ
निरीक्षण के दौरान डीएम मेधा रूपम ने वहां काम कर रहे मजदूरों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने बहुत ही पते की बात कही कि ये मजदूर सिर्फ एक बेल्ट नहीं बना रहे, बल्कि हजारों लोगों की जान बचाने वाला सुरक्षा कवच तैयार कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने काम की क्वालिटी और वहां सुरक्षा के इंतजामों को भी परखा ताकि किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही न रहे।
Noida news: महिला कर्मचारियों के बीच पहुंचीं जिलाधिकारी
डीएम ने अपना खास वक्त उन महिला कर्मचारियों के साथ बिताया जो असेंबली लाइन में काम करती हैं। उन्होंने बड़ी आत्मीयता से उनके कामकाज की चुनौतियों, वहां मिलने वाली सुविधाओं और उनकी सेहत के बारे में चर्चा की। उन्होंने महिलाओं को कंपनी में चल रहे मेडिकल कैंप के फायदों के बारे में भी बताया ताकि वे अपनी सेहत को लेकर जागरूक रह सकें।
Noida news: फैक्ट्री के अंदर ही लगा फ्री मेडिकल कैंप
श्रमिकों की सेहत को दुरुस्त रखने के लिए फैक्ट्री परिसर में ही जिला प्रशासन और यथार्थ हॉस्पिटल के सहयोग से एक मुफ्त स्वास्थ्य शिविर लगाया गया था। डीएम ने खुद इस कैंप का निरीक्षण किया जहां बीपी, शुगर, ईसीजी और आंखों की जांच जैसी सुविधाएं दी जा रही थीं। उन्होंने डॉक्टरों की टीम को निर्देश दिए कि हर एक कर्मचारी की जांच पूरी गंभीरता से की जाए।
आंखों की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता
Noida news: कामगारों से बातचीत के दौरान डीएम मेधा रूपम ने उनकी समस्याओं को भी करीब से सुना। उन्होंने गौर किया कि लगातार बारीकी वाला काम करने की वजह से बहुत से मजदूरों की आंखों पर बुरा असर पड़ता है। इसे देखते हुए उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आंखों की रेगुलर जांच और सुरक्षा के उपायों को और ज्यादा पुख्ता किया जाए ताकि काम के साथ-साथ मजदूरों की सेहत से भी कोई समझौता न हो।
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