बड़ी खबर: मुंबई के बाद यूपी में भी ‘हलाल लाइफस्टाइल टाउनशिप’, अब्दुल्ला रेजिडेंसी में हिन्दुओं पर बैन?

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में अब्दुल्ला रेजिडेंसी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप लगाया जा रहा है कि इस कॉलोनी में केवल एक धर्म विशेष के लोगों को ही संपत्ति खरीदने और प्रवेश की अनुमति दी जा रही है, जबकि हिंदू परिवारों को अनौपचारिक रूप से रोका जा रहा है। मामला राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। ऊर्जा राज्य मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर ने आरोपों की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। वहीं बिल्डर ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि कॉलोनी में किसी को संपत्ति खरीदने से नहीं रोका गया है। प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। आइए जानते हैं पूरी कहानी।
विवाद की शुरुआत: हिंदू परिवारों के प्रवेश पर रोक का आरोप
मेरठ में स्थित अब्दुल्ला रेजिडेंसी में हिंदू परिवारों को प्लॉट खरीदने और प्रवेश करने से रोकने का आरोप सामने आया है। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि कॉलोनी में केवल मुस्लिम परिवारों को ही प्लॉट आवंटित किए जा रहे हैं। कई हिंदू परिवारों ने शिकायत की है कि उन्हें संपत्ति खरीदने से मना कर दिया गया।
इस मामले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। सवाल उठ रहा है कि क्या किसी निजी कॉलोनी में धार्मिक आधार पर आवंटन रोका जा सकता है, जबकि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है।
मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर का बयान: जांच होगी, दोषियों पर कार्रवाई
ऊर्जा राज्य मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर ने कहा है कि यह मामला गंभीर है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी कॉलोनी में धर्म के आधार पर प्रवेश या संपत्ति खरीदने पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
मंत्री ने जिलाधिकारी और आवास विकास विभाग को मामले की जांच करने का निर्देश दिया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि दोषी पाए जाने पर बुलडोजर कार्रवाई सहित कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह कॉलोनी सरकारी अधिग्रहण क्षेत्र के भीतर आती है तो इसे किस आधार पर अलग कर दिया गया। प्रशासन से मामले की रिपोर्ट तलब की गई है।
बिल्डर महेंद्र गुप्ता का पक्ष: आरोप निराधार, सभी के लिए खुले दरवाजे
अब्दुल्ला रेजिडेंसी के बिल्डर महेंद्र गुप्ता ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि कॉलोनी आवास विकास और रेरा से स्वीकृत है।
उन्होंने स्पष्ट कहा, “कॉलोनी में किसी भी धर्म के व्यक्ति को प्लॉट खरीदने से नहीं रोका गया है। यह पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के तहत बनाई गई कॉलोनी है। कुछ असामाजिक तत्व इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।”
बिल्डर ने यह भी कहा कि कॉलोनी में प्रवेश और बिक्री सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध है।
प्रशासन की कार्रवाई: नायब तहसीलदार की अगुवाई में जांच शुरू
शनिवार को नायब तहसीलदार के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची। टीम ने कॉलोनी में जाकर दस्तावेजों की जांच की और स्थानीय लोगों से बात की।
जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि क्या वास्तव में प्रवेश पर कोई रोक लगाई जा रही है या यह सिर्फ अफवाह है। प्रशासन ने सभी पक्षों से लिखित बयान लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
संवैधानिक अधिकारों पर सवाल: धार्मिक भेदभाव से जुड़े गंभीर मुद्दे
यह मामला सिर्फ एक कॉलोनी तक सीमित नहीं है, बल्कि संविधान में दिए गए समान अधिकारों से भी जुड़ता है। भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को बिना धर्म, जाति, लिंग या भाषा के आधार पर भेदभाव से मुक्त जीवन जीने का अधिकार देता है।
धार्मिक आधार पर प्रवेश रोकना न केवल सामाजिक असमानता पैदा कर सकता है, बल्कि क्षेत्रीय तनाव भी बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में प्रशासन की त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई आवश्यक है।



