यूपी की राजधानी में देह व्यापर का सनसनीखेज स्टिंग ऑपरेशन, रशियन-थाई-अफ्रीकन लड़कियां, सब मिलेंगी!

दैनिक भास्कर की 20 दिन की इनवेस्टिगेशन रिपोर्ट में सामने आया है कि लखनऊ के पॉश इलाके में कई स्पा-सेंटर्स मसाज की आड़ में विदेशी (रशियन, थाई, अफ्रीकन) लड़कियों को ऑन-डिमांड उपलब्ध करा कर एक्स्ट्रा-सर्विस यानी देह-व्यापार चला रहे हैं। रिपोर्ट में एजेंटों के कथित ऑडियो-कॉल, वॉट्सऐप-फोटो और छिपे कैमरे से दर्ज फुटेज के जरिए रैकेट का तरीका और रेट भी उजागर किए गए हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक यह धंधा सालों से चल रहा है और मैनपावर एजेंसियाँ विदेशी लड़कियों को झांसे में लेकर भारत लाती हैं। (रिपोर्ट: Dainik Bhaskar — exclusive sting)

कैसे पकड़ा गया नेटवर्क ?

टीम ने गूगल-खोज और वॉट्सऐप क्वेरी से स्पा-सेंटरों के एजेंटों के नंबर जुटाए। तीन एजेंट-कांटैक्ट (मुस्कान, सचिन, एक कर्मी करण) को पहचान कर रिपोर्टर ने मोबाइल पर बातचीत शुरू की। एजेंटों ने लोकेशन, फोटो और रूम-विवरण भेजे; टीम ने गोमती नगर-एक्सटेंशन व अंटस-शॉपिंग मॉल के पास चल रहे कुछ पॉश फ्लैट/स्पा का फील्ड व स्टिंग किया — रिसेप्शन, रूम और एजेंट के साथ-साथ छिपे कैमरे से सर्विस-प्रोसेस रिकॉर्ड किए गए। दैनिक भास्कर का दावा है कि कई बार एजेंटों ने सीधे कहा: “रशियन/थाई/अफ्रीकन उपलब्ध” और कस्टमर-फ्रेंडली टोल-टैक्स के नाम पर ‘फुल सर्विस’ का प्रस्ताव दिया गया।

रेट और व्यवस्था

स्टिंग के दौरान एजेंट सचिन ने रिपोर्टर से कहा: “थाई गर्ल्स अवेलेबल, रशियन 2 दिन बाद।” एजेंटों ने वॉट्सऐप पर विदेशी लड़कियों की तस्वीरें भेजीं और कहा कि एक घंटे की कीमत आमतौर पर ₹5,000 से शुरू होती है; कुछ जगहों पर रेट ₹10,000–15,000 तक बताया गया। दैनिक भास्कर द्वारा तैयार किए ग्राफिक के अनुसार सामान्य रेंज (स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक) कुछ इस प्रकार थी:

  • इंडियन गर्ल: ₹2,500–5,000 (प्रति यूनिट)

  • थाई गर्ल: ₹5,000–8,000

  • रशियन गर्ल: ₹6,000–10,000

  • अफ्रीकन गर्ल: ₹8,000–10,000

एजेंटों ने खुलकर कहा कि विदेशी लड़कियाँ मैनपावर एजेंसियों या झांसे में लाकर क्लब/स्पा/फ्लैट पर भेजी जाती हैं और ग्राहक को ‘फुल सर्विस’ ऑफर करके पैसे वसूल किए जाते हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने भी किस तरह ग्राहक को अंदर ले जाकर दबाव बनाकर एक्स्ट्रा-सर्विस दी जाती है, छिपे कैमरे से यह रिकॉर्ड किया। (रिपोर्ट का हवाला)

किस तरह स्पा-सेंटर ग्राहक फंसाते हैं ?

स्टिंग फुटेज में रिच-रिसेप्शन पर ग्राहक से पहले सामान्य मसाज का भुगतान लिया जाता (उदाहरण: ₹2,000), फिर बंद कमरे में मसाज के बहाने अतिरिक्त सर्विस-प्रस्ताव और दबाव दिखा। रजिस्टर/लाइसेंस और स्वास्थ्य-सुरक्षा का जिक्र अक्सर नहीं मिलता; कई बार कस्टमर ने इनकार किया, फिर भी दबाव या बहाने से व्यवहार करवाया गया। रिपोर्टर के पहुंचने पर कई जगहों पर कहा गया कि “पुलिस नहीं आएगी — तीन साल से चला आ रहा है” — ऐसे दावे भी रिकॉर्ड हुए हैं।

विदेशी लड़कियाँ भारत कैसे लायी जा रही हैं ?

जांच में बताया गया कि कुछ एजेंसियाँ विदेशी लड़कियों को नौकरी के झांसे में भारत लातीं — क्लब, बार, स्पा-सेंटर में ‘अच्छी सैलरी’ और विदेशी अनुभव का वादा कर के। आकर इनमें से कई को देह-व्यापार में धकेला जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ सेंटर्स में भारतीय कॉलेज-गर्ल्स और स्थानीय लड़कियाँ भी टेक-अप के जरिए काम पर लगती हैं। स्टिंग के हवाले से यह आरोप उठाया गया है कि पैकिंग/लेमिनेशन/ऑन-डिमांड सिस्टम से बाजार-डिमांड पूरा किया जाता है।

कानूनी पहलू और पुलिस का रुख

लखनऊ पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र कुमार सेंगर ने दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के संदर्भ में कहा कि स्पा-सेंटर्स की नियमित जांच होती है और यदि अनैतिक/अवैध गतिविधि का सत्यापन हुआ तो संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने कहा कि शिकायत मिलने पर रेड/छापामारी की जाएगी और विदेशी नागरिकों से जुड़ा कोई ट्रैफिकिंग का सबूत मिला तो सम्बन्धित प्रावधानों के तहत मुक़दमाबाजी व वैधानिक कार्यवाही होगी। (पुलिस बयान उद्धृत)

स्पा-लाइसेंस और सुरक्षा-नियमों पर सख्ती जरूरी

सीनियर एडवोकेट रविशंकर पांडेय ने बताया कि स्पा और मसाज सेवा कानूनी रूप से मान्य हैं और इन्हें हेल्थ-वेलनेस श्रेणी में रखा जाता है, पर लाइसेंस, कर्मचारी पहचान, स्वास्थ्य व सुरक्षा मानक और पारदर्शी अनुबंध अनिवार्य होना चाहिए। यदि विदेशी नागरिकों को मानव-व्यापार के द्वारा लाया गया है तो यह अपराध है और जांच कर के दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

पिछली कार्रवाइयाँ

रिपोर्ट में रेफरेंस दिए गए पिछले मामलों की ओर भी ध्यान दिलाया गया: सितंबर-2024 में प्रयागराज के चार स्पा-सेंटर्स से 13 लड़कियाँ पकड़ी गई थीं (एक युगांडा-नागरिक शामिल), और अक्टूबर-2024 में संत कबीर नगर के स्पा-रैकेट पर छापेमारी हुई जिसमें कई गिरफ्तारियां हुई थीं — इससे स्पष्ट है कि यह स्थानीय स्तर पर बार-बार उठता मुद्दा रहा है।

क्या करने की ज़रूरत है?

यह स्टिंग रिपोर्ट कई गंभीर सवाल छोड़ती है: स्पा-सेंटरों के लाइसेंस-चेक कौन करता है, मैनपावर एजेंसियों की निगरानी कैसे होती है, और कैसे विदेशी नागरिकों की आवाजाही व रोजगार की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। अब आवश्यक है: पुलिस और प्रशासन त्वरित, पारदर्शी जांच करें; मानव-तस्करी/ट्रैफिकिंग की सम्भावित कड़ियों को खंगाले; और डीसी/नगर निगम/स्वास्थ्य विभाग स्पा-लाइसेंसिंग व निरीक्षण में कड़ाई लाएं ताकि उनसे जुड़ी अवैध गतिविधियाँ रोकी जा सकें।


क्रेडिट: यह रिपोर्ट और स्टिंग फुटेज — Dainik Bhaskar (20 दिन की फील्ड इनवेस्टिगेशन और स्टिंग) — के आधार पर तैयार की गई है। दैनिक भास्कर द्वारा उपलब्ध कराए गए ऑडियो-क्लिप, वॉट्सऐप-फोटो व छिपे कैमरे के फुटेज का हवाला ऊपर दिया गया है।

कानूनी नोट: लेख में उठाए गए आरोप दैनिक भास्कर की इनवेस्टिगेशन पर आधारित हैं; जिन भी व्यक्तियों/स्थापनों पर आरोप हैं, उनका पक्ष और आधिकारिक जांच का परिणाम अंतिम तय करेगा।

पूरी दैनिक भास्कर रिपोर्ट का लिंक -> https://www.bhaskar.com/local/uttar-pradesh/lucknow/news/lucknow-thai-spa-sex-racket-african-russian-girls-prostitution-136060169.html

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