UP: एनकाउंटर में मारे गए सगे भाइयों के दो नाम, खान-तिवारी.. पिता हिन्दू और माँ मुस्लिम, हुए चौंकाने वाले खुलासे

उत्तर प्रदेश के सीतापुर में हुए चर्चित पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी हत्याकांड में बड़ा एक्शन हुआ है। गुरुवार तड़के STF और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में इस हत्या के दो मुख्य आरोपी शूटरों को मुठभेड़ में मार गिराया गया। इस हत्याकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था, जिसमें अब पुलिस ने बड़ा एक्शन लेते हुए केस की कड़ियों को जोड़ना शुरू कर दिया है।
एनकाउंटर में ढेर हुए दोनों शूटर
पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल ने बताया कि STF और स्थानीय पुलिस को सूचना मिली थी कि हत्याकांड में शामिल शूटर किसी मूवमेंट में हैं। इसके बाद गुरुवार तड़के पिसावा थाना क्षेत्र में टीम चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान बाइक से आ रहे दोनों संदिग्धों को रोका गया। लेकिन दोनों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में पुलिस ने कार्रवाई की और दोनों शूटरों को गोली लगी। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
शूटरों की पहचान: दोहरे नाम, दो आधार कार्ड
पुलिस ने बताया कि मृत शूटरों की पहचान मिश्रिख थाना क्षेत्र के अटवा गांव निवासी राजू तिवारी उर्फ रिजवान खान और संजय तिवारी उर्फ अकील खान के रूप में हुई है। ये दोनों सगे भाई थे। खास बात यह है कि इनके पास दो-दो आधार कार्ड मिले हैं — एक हिंदू नाम से और दूसरा मुस्लिम नाम से। इनकी मां मुस्लिम और पिता हिंदू हैं। दोनों के खिलाफ पहले से ही एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित था।
पत्रकार की हत्या के पीछे मंदिर का पुजारी
जांच में सामने आया कि 8 मार्च 2025 को राघवेंद्र बाजपेयी की हत्या की साजिश कारेदेव बाबा मंदिर के पुजारी शिवानंद बाबा उर्फ विकास राठौर ने रची थी। बताया गया कि पत्रकार ने पुजारी को मंदिर में आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था और इसकी फोटो भी खींची थी। पुजारी को आशंका थी कि यह बात सार्वजनिक हो जाएगी। इस डर से उसने दोनों शूटरों को 4 लाख रुपये की सुपारी देकर हत्या करवा दी।
हत्या के बाद प्रदेशभर में मचा था बवाल
पत्रकार की हत्या लखनऊ-दिल्ली नेशनल हाईवे पर हुई थी, जब वे बाइक से जा रहे थे। हमलावरों ने हेमपुर रेलवे क्रॉसिंग के पास उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की। तीन गोलियां कंधे और सीने में लगीं और अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो गई। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने हाईवे जाम कर प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस और पत्रकार के परिजनों के बीच झड़प भी हुई थी।
33 दिन की जांच के बाद हुआ था खुलासा
पुलिस ने पहले इस केस को धान खरीद घोटाले से जोड़ने की कोशिश की, लेकिन बाद में छानबीन में असली साजिश का पता चला। पुजारी शिवानंद बाबा ने कबूल किया कि राघवेंद्र के पास उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें थीं और वह 20 लाख रुपये मांग रहा था। इससे बचने के लिए उसने दो शूटरों को सुपारी दी और हत्या करवा दी।
पुजारी और दो सहयोगी पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं
इस केस में अब तक मुख्य साजिशकर्ता शिवानंद बाबा, उसके साथी निर्मल सिंह और असलम गाजी को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। अब दोनों शूटरों के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद केस लगभग पूरी तरह से खुल चुका है। पुलिस की इस कार्रवाई से प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर सकारात्मक संदेश गया है।
पत्रकारों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल
यह हत्याकांड न सिर्फ एक व्यक्ति की मौत बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हमला है। सवाल यह भी है कि अगर पुलिस समय रहते कार्रवाई करती तो क्या राघवेंद्र को बचाया जा सकता था? ऐसे मामलों में प्रशासन को तेजी से कदम उठाने और पत्रकारों की सुरक्षा के लिए विशेष नीति बनाने की जरूरत है।



