SIR विवाद: “अरे भाई.. मैं जिंदा हूँ” – जिसे वोटर लिस्ट में मृत घोषित किया, वो खुद पहुंच गया चुनाव आयोग के दफ्तर

पटना। बिहार में चुनावी लापरवाही का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक जिंदा शख्स को वोटर लिस्ट में मृत घोषित कर दिया गया, और जब वह खुद अपनी ‘जिंदगी’ का सबूत लेकर चुनाव आयोग पहुंचा तो अफसरों के बीच अफरा-तफरी मच गई। यह घटना प्रशासनिक कार्यप्रणाली की लापरवाहियों और मतदाता सूची में हो रही गड़बड़ियों की पोल खोल रही है।
वोटर लिस्ट में ‘मृतक’ का नाम, जबकि शख्स जिंदा
मामला बिहार का है, जहां मतदाता सूची में एक जिंदा व्यक्ति का नाम ‘मृतक’ श्रेणी में डाल दिया गया। इस गलत प्रविष्टि के चलते वह अपने मताधिकार से वंचित हो सकता था। पीड़ित ने जब अपनी स्थिति देखी तो हैरानी में पड़ गया और तुरंत चुनाव आयोग का रुख किया।
चुनाव आयोग कार्यालय में पेश किया ‘जिंदगी’ का सबूत
पीड़ित व्यक्ति ने आयोग के सामने आधार कार्ड, पहचान पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज पेश किए, यह साबित करने के लिए कि वह पूरी तरह से जीवित है। जैसे ही यह मामला सामने आया, वहां मौजूद अधिकारी और कर्मचारी भी हैरान रह गए। यह लापरवाही न केवल मतदाता के अधिकारों का हनन है बल्कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करती है।
चुनाव आयोग ने शुरू की जांच
सूचना मिलते ही चुनाव आयोग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रविष्टि किस स्तर पर और कैसे गलत हुई, इसका पता लगाया जाएगा। साथ ही पीड़ित का नाम सही कर उसे मतदाता सूची में बहाल करने की प्रक्रिया तेज की गई है।
गड़बड़ी का बड़ा असर, अन्य नामों की भी होगी जांच
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर एक जिंदा व्यक्ति को मृत घोषित किया जा सकता है, तो संभव है कि इस तरह की और भी गड़बड़ियां सूची में छिपी हों। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस घटना के बाद अन्य प्रविष्टियों की भी जांच की जाएगी, ताकि किसी और मतदाता के साथ ऐसा न हो।



