कानपुर में TAVI तकनीक से हृदय रोगियों को नई जिंदगी, 30 मिनट में बदलेगा ऑर्टिक वाल्व
कानपुर में शुरू हुई TAVI तकनीक, बिना सीना खोले बदला जाएगा हार्ट वाल्व बुजुर्ग और हाई-रिस्क मरीजों के लिए सुरक्षित विकल्प, 30 मिनट में पूरी प्रक्रिया OneKria ट्रायल के तहत 30 मरीजों को मिलेगा पूरी तरह मुफ्त इलाज

Technology: कानपुर से हृदय रोगियों के लिए एक बेहद राहत भरी और खुशखबरी सामने आई है। अब गंभीर हृदय रोग से जूझ रहे मरीजों को पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी से नहीं गुजरना पड़ेगा। आधुनिक TAVI (Transcatheter Aortic Valve Implantation) तकनीक के जरिए ऑर्टिक वाल्व को सिर्फ जांघ की नस के रास्ते बदला जा सकेगा। यह तकनीक खासतौर पर उन मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जिनके लिए बड़ी सर्जरी करना जोखिम भरा होता है।
क्या है TAVI तकनीक?
कानपुर के LPS इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर और वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संतोष कुमार सिन्हा के मुताबिक, TAVI एक आधुनिक कैथेटर आधारित तकनीक है। इसमें जांघ की बड़ी नस (फेमोरल आर्टरी) के जरिए एक नया बायोप्रोस्थेटिक वाल्व दिल तक पहुंचाया जाता है। यह वाल्व फोल्डेड स्थिति में शरीर के अंदर डाला जाता है और दिल तक पहुंचते ही अपने आप खुलकर खराब ऑर्टिक वाल्व की जगह ले लेता है। पूरी प्रक्रिया में सिर्फ 30 से 35 मिनट का समय लगता है। मरीज को सामान्य या लोकल एनेस्थीसिया दिया जाता है और अधिकतर मामलों में 1–2 दिन में ही अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है।
Technology: ओपन हार्ट सर्जरी से कितना अलग है TAVI?
अब तक ऑर्टिक स्टेनोसिस से पीड़ित मरीजों को ओपन हार्ट सर्जरी करानी पड़ती थी। इसमें सीना चीरकर दिल तक पहुंचना, हार्ट-लंग मशीन का इस्तेमाल और लंबा रिकवरी पीरियड शामिल होता था। इस दौरान संक्रमण, अधिक रक्तस्राव और अन्य जटिलताओं का खतरा भी काफी ज्यादा रहता था। खासतौर पर बुजुर्ग, किडनी या फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए यह सर्जरी कई बार जानलेवा साबित हो सकती थी। वहीं TAVI में न तो सीना खोला जाता है और न ही बड़ा चीरा लगाया जाता है। इससे जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है। डॉ. सिन्हा के अनुसार, जिन मरीजों में ओपन हार्ट सर्जरी से मौत का खतरा 15–20% तक होता है, वहां TAVI की सफलता दर कहीं बेहतर है और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट आते हैं।
Technology: TAVI तकनीक के प्रमुख फायदे
संक्रमण और रक्तस्राव का खतरा बेहद कम, बिना सीना खोले वाल्व रिप्लेसमेंट, सिर्फ 30–35 मिनट की प्रक्रिया, 1–2 दिन में अस्पताल से छुट्टी बुजुर्ग और हाई-रिस्क मरीजों के लिए सुरक्षित बेहतर जीवन गुणवत्ता और लंबी उम्र।
भारत में TAVI को सुलभ बनाने की पहल
डॉ. संतोष कुमार सिन्हा ने बताया कि भारत में TAVI तकनीक को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए अमेरिकी कंपनी OneKria के सहयोग से एक खास क्लिनिकल ट्रायल चलाया जा रहा है। इस ट्रायल में देश के 7 बड़े अस्पताल शामिल हैं, जिनमें कानपुर का LPS इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी भी अहम भूमिका निभा रहा है। शुरुआती चरण में 30 मरीजों का चयन किया जाएगा और इन सभी का इलाज पूरी तरह निशुल्क होगा। आमतौर पर TAVI प्रक्रिया की लागत 15 से 20 लाख रुपये तक होती है, ऐसे में यह ट्रायल गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों के लिए किसी सुनहरे मौके से कम नहीं है।
सख्त जांच और लंबा फॉलो-अप
Technology: ट्रायल के तहत मरीजों की सख्त मेडिकल स्क्रीनिंग की जा रही है। प्रक्रिया के बाद लंबे समय तक फॉलो-अप किया जाएगा ताकि भारतीय मरीजों में इस तकनीक की सुरक्षा और प्रभावशीलता को लेकर मजबूत आंकड़े तैयार किए जा सकें। डॉ. सिन्हा के अनुसार, “यह ट्रायल न सिर्फ मरीजों को मुफ्त इलाज देगा, बल्कि भारत में TAVI तकनीक को और बेहतर व सुलभ बनाने में भी मदद करेगा।”



