एचसी ने याचिकाकर्ता से पूछा बताएं किस कानून का हो रहा उल्लंघन

उत्तराखंड के पंतनगर में बनने वाले न्यू ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा को लेकर दायर जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश आर.एस. चैहान की अगुवाई वाली खंडपीठ ने गंभीर रूख अख्तियार करते हुए याचिकाकर्ता से जनहित याचिका के औचित्य पर जवाब मांगा है और पूछा कि बताएं प्रस्तावित हवाई अड्डा मामले में किस कानून का उल्लंघन हो रहा है?
उधमसिंह नगर के सामाजिक कार्यकर्ता केशव कुमार पासी की ओर से दायर जनहित याचिका पर आज मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली खंडपीठ में सुनवाई हुई। अदालत की ओर से सर्वप्रथम जनहित याचिका के औचित्य पर सवाल उठाये गये। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने किस हैसियत से जनहित याचिका दायर की है और प्रस्तावित हवाई अड्डा से किस कानून का उल्लंघन हो रहा है। याचिकाकर्ता के पास इस प्रश्न का कोई जवाब नहीं था। याचिकाकर्ता की ओर से हालांकि कहा गया कि विभिन्न संस्थाओं की रिपोर्ट में भूमि की गुणवत्ता पर सवाल उठाये गये हैं। अदालत की ओर से कहा गया कि राष्ट्रीय स्तर के हवाई अड्डा के निर्माण से प्रदेश की जनता का ही लाभ है। अदालत ने याचिकाकर्ता से अगली सुनवाई तक जवाब पेश करने को कहा है।
दायर याचिका में कहा गया है कि गोविंद वल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय देश का ऐतिहासिक विश्वविद्यालय है और इसे हरित क्रांति का जनक माना जाता है। विवि की 1072 एकड़ भूमि को अधिग्रहीत कर हवाई अड्डा का निर्माण किया जा रहा है। अभी तक विवि की 4300 एकड़ भूमि गैर कृषि कार्यों के लिये अधिग्रहीत की जा चुकी है। साथ ही जिस भूमि पर हवाई अड्डा बनाया जा रहा है, वह दलदली है। हवाई अड्डा के बनने से विश्वविद्यालय की अध्ययन तथा अध्यापन जैसी गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। याचिकाकर्ता की ओर से इसे खारिज करने की मांग की गयी है। इससे पहले अदालत केन्द्र सरकार के साथ ही अन्य पक्षकारों से जवाब मांगा चुकी है।

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