बड़ी खबर: डकैती का मास्टरमाइंड निकला नेशनल वॉलीबॉल खिलाड़ी, आँखों में मिर्च डालकर लूटे थे 15 लाख के जेवर!

दिल्ली पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 15 लाख रुपये की ज्वैलरी लूट के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस वारदात का मास्टरमाइंड एक राष्ट्रीय स्तर का वॉलीबॉल खिलाड़ी निकला।
मामला समयपुर बादली थाना क्षेत्र का है, जहां आरोपियों ने ज्वैलरी शोरूम से सोने की चेनें चुराईं और फरार हो गए। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पूरे गैंग को दबोच लिया है।

गिरफ्तार आरोपी और उनकी पहचान

पुलिस ने जिन तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान इस प्रकार हुई है —

  • सुमित डबास उर्फ सोनू (33 वर्ष) — राष्ट्रीय स्तर का वॉलीबॉल खिलाड़ी

  • विशाल वर्मा (26 वर्ष)

  • मनीष वर्मा (18 वर्ष)

जांच में खुलासा हुआ है कि सुमित और विशाल की मुलाकात 2024 में तिहाड़ जेल में हुई थी, जब दोनों अलग-अलग मामलों में बंद थे। जेल से बाहर आने के बाद दोनों ने मिलकर ज्वैलरी शॉप लूटने की योजना बनाई।

कैसे बनी लूट की प्लानिंग

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने सोने की चेन खरीदने के बहाने दुकान में प्रवेश किया। उसी दौरान एक आरोपी ने दुकानदार की आंखों में मिर्च स्प्रे छिड़का और ट्रे में रखे सोने के आभूषण लूट लिए। तीनों आरोपी फरार हो गए।
घटना के बाद पुलिस ने CCTV फुटेज और मोबाइल लोकेशन ट्रेस कर आरोपियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई

दिल्ली पुलिस के डीसीपी (बाहरी उत्तर) हरेश्वर स्वामी ने बताया कि 4 अक्टूबर को घटना दर्ज होने के बाद विशेष टीम बनाई गई। जांच के बाद सुमित, विशाल और मनीष को गिरफ्तार कर लिया गया।
आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उन्होंने एक सोने की चेन एक रजिस्टर्ड गोल्ड एक्सचेंजर को बेच दी थी और उस पैसे से मोबाइल फोन खरीदे व कुछ रकम रिश्तेदारों को भेजी।

कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच

तीनों के खिलाफ डकैती, चोरी, धोखाधड़ी और साजिश की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने कहा है कि ज्वैलरी की बरामदगी और अन्य संभावित साथियों की पहचान के लिए जांच जारी है।
अधिकारियों के अनुसार, यह घटना न सिर्फ आर्थिक अपराध का मामला है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे कुछ खिलाड़ी अपराध की राह पर चले जाते हैं।

सामाजिक और कानूनी प्रभाव

पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी का इस तरह अपराध में शामिल होना खेल जगत के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि समाज में अनुशासन और आर्थिक दबाव के बीच खिलाड़ियों को पुनर्वास और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की भी आवश्यकता है।

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