लव मैरिज या ‘मुर्गा-बकरा भात शो’? 45 गाँव के 500 लोगों ने दामाद के घर डेरा डाला, मटन-पार्टी कर के ही जाएंगे!

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के पखांजूर इलाके में शुक्रवार को हुआ कुछ ऐसा, जिसे सुनकर बॉलीवुड भी शर्मा जाए। मामला कुछ यूं है – प्रभाष विश्वास (26) ने महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले की अलीशा पोटामी (25) से प्रेम विवाह कर लिया। सब ठीक था, लेकिन आदिवासी समाज की परंपरा के मुताबिक अगर कोई लड़की अपने समाज के बाहर शादी करे, तो दामाद को मुर्गा-बकरा भात और अतिरिक्त सामग्री चढ़ाना अनिवार्य है।

अब आप सोच रहे होंगे, “इतना बड़ा डीज़ास्टर क्यों?” तो जान लें – 500 लोग लड़की वाले और आसपास के गांवों से युवक के घर डेरा डालने आ गए। खाना, बिस्तर, राशन – सब कुछ साथ लाए। वजह? दामाद ने अब तक अपनी ‘सामाजिक ड्यूटी’ पूरी नहीं की।

प्रेम विवाह की पूरी कहानी

साल 2022 में प्रभाष और अलीशा ने कोर्ट मैरिज की थी। शादी के बाद युवती ने अहेरी में नर्सिंग की पढ़ाई पूरी की और हाल ही में युवक के घर पहुंची। परंपरा से जरा भी समझौता नहीं – शादी से कोई आपत्ति नहीं, लेकिन मुर्गा-बकरा भात और 2 लाख रुपए की सामग्री नहीं देने पर गांव वालों ने अपने ट्रैक्टर-बस और पैदल सेना के साथ डेरा डाल दिया।

गुमशुदगी और पुलिस की जांच

युवती के घर न लौटने पर महाराष्ट्र पुलिस को गुमशुदगी की रिपोर्ट मिली। जांच में युवती ने साफ कहा – “मैं अपनी मर्जी से प्रेम विवाह कर रही हूँ और प्रभाष के साथ रहना चाहती हूँ।” महाराष्ट्र पुलिस ने मामला खत्म किया, लेकिन गांव में ‘परंपरा पालन’ का अल्टीमेटम अभी बाकी था।

दामाद ने दिया ऑफर, पर समाज ने कहा ‘नो चांस’

युवती के परिवार ने लगभग 2 लाख रुपए की सामग्री और भात की ड्यूटी मांगी, जबकि युवक का परिवार सिर्फ 30 हजार रुपए देने को तैयार था। अब दो लोग ‘समझौता करें या नहीं’ पर विचार कर रहे थे – और बाकी 500 लोग धूप-छांव, बारिश और धूल में डेरा जमाए खड़े थे।

समाज ने स्पष्ट किया: शादी पर नहीं, पर परंपरा जरूरी

समाज प्रमुखों कोतुराम पोटवी और नितिन पद्दा ने कहा – “हमें शादी से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन परंपरा निभाना जरूरी है।” यानी, प्यार पर कोई आपत्ति नहीं, पर सामाजिक ‘दंड’ जरूर देना होगा। सरपंच ने तो सुरक्षा के लिए युवती वालों को स्कूल में रहने की जगह भी दे दी।

जब परंपरा बन जाए ड्रामा

तो मामला इतना बन गया कि प्रेम विवाह करने वाले युवक-युवती को अपनी सुरक्षा और आज़ादी के लिए गांव से बाहर निकलना पड़ा। मुर्गा-बकरा भात और 2 लाख की ‘ड्यूटी’ ने शादी के सपने को बना दिया ‘सामाजिक रियालिटी शो’।

सच कहें तो, प्यार और परंपरा का ये टकराव बताता है कि आधुनिकता और आदिवासी रीति-रिवाज कब और कैसे हिट और ड्रामा दोनों बना सकते हैं।

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