Independence Day: आजादी के बाद इन 29 गाँव में पहली बार लहराया तिरंगा, अबतक फहराया जाता था काला झंडा

आज 15 अगस्त, पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है। लेकिन छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के 29 गांवों के लिए यह आज का दिन और भी खास है। कभी नक्सलियों के कब्जे में रहे ये गांव आज पहली बार आजादी का असली जश्न मना रहे हैं। जहां पहले काला झंडा लहराता था, आज वहां तिरंगा फहराया गया और हाथों में तिरंगा लेकर ग्रामीण “भारत माता की जय” का उद्घोष कर रहे हैं।
सुरक्षा बलों की मेहनत और गांवों की आज़ादी
सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर जिलों में नक्सलियों का गनतंत्र लंबे समय तक हावी रहा। लेकिन पिछले साल सुरक्षा बलों ने इन अंदरूनी इलाकों में कदम रखा। 29 कैंप स्थापित किए गए, नक्सलियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया गया और उन्हें खदेड़ा गया। अब इन गांवों के लोग आजादी का जश्न शान से मना रहे हैं, और उनके चेहरे पर खुशियों की चमक देखी जा सकती है।
ध्वजारोहण और जश्न का माहौल
बस्तर के संभागीय मुख्यालय जगदलपुर के लाल बाग मैदान में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, दंतेवाड़ा में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और MLA किरण सिंहदेव ने ध्वजारोहण किया। ग्रामीणों ने अपने-अपने हाथों में तिरंगा लिया और पूरे उत्साह के साथ राष्ट्रीय पर्व मनाया। बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा के कुल 29 गांवों में यह दृश्य देखने लायक था।
नक्सलियों पर लगातार कार्रवाई, अब थोड़ा डर
हाल ही में नारायणपुर के अबूझमाड़ में DRG के जवानों ने माओवादी लीडर बसवा राजू का एनकाउंटर किया। इसके बाद नक्सली संगठन अब थोड़े बैकफुट पर हैं। पुजारी कांकेर, कोंडापल्ली और जिडपल्ली जैसे पहले सुरक्षित माने जाने वाले गांवों में भी अब सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ गई है।
IG की अपील: हिंसा छोड़कर लौटें मुख्य धारा में
बस्तर के IG सुंदरराज पी ने नक्सली संगठनों से अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़ें और मुख्य धारा में लौटकर अपने गांवों और क्षेत्र के विकास में योगदान दें। उन्होंने कहा कि आजादी का असली मतलब सिर्फ झंडा फहराना नहीं, बल्कि शांति, सुरक्षा और विकास के साथ जीवन जीना है।
आजादी का जश्न और नया इतिहास
आज, जब पूरा भारत तिरंगे के नीचे गर्व से खड़ा है, बस्तर के इन गांवों के लोग भी गर्व से झंडा फहरा रहे हैं। यह कहानी सिर्फ आज के जश्न की नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस और उम्मीद की कहानी भी है। देश की आज़ादी के 75वें साल में बस्तर के लोग अपने लिए और अपने बच्चों के लिए सच्ची आज़ादी का अनुभव कर रहे हैं।



