पुलिस का शर्मनाक वीडियो वायरल: पति को सरेआम पीटा, पत्नी से गंदी हरकत.. चेकिंग के बहाने दरोगा की काली करतूत

बिहार के मोतिहारी जिले के छतौनी थाना क्षेत्र में रविवार की रात एक दंपती के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा की गई शर्मनाक बदसलूकी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में दिख रहा है कि वाहन जांच के बहाने पुलिसकर्मी पति को पीटते हुए और पत्नी के साथ अभद्रता करते हुए नजर आ रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी स्वर्ण प्रभात ने तुरंत दारोगा अनुज कुमार को निलंबित कर दिया है।
पुलिस की मारपीट और छेड़छाड़ का वायरल वीडियो
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में दो पुलिसकर्मी महिला को जबरन पकड़कर जीप में बैठाते हुए देखे गए हैं। वीडियो में यह भी दिख रहा है कि पति के साथ पुलिस द्वारा मारपीट की जा रही है और भीड़ के बीच पुलिसकर्मियों और लोगों के बीच धक्का-मुक्की होती रही। इस घटना ने स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर भारी गुस्सा भड़काया है।
बिहार पुलिस की शर्मनाक हरकत: वाहन चेकिंग के नाम पर दंपति से की अभद्रता..
अंधेरे में जबरन गाड़ी में बैठाने की कोशिश, विरोध पर बवाल। पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल।
पूरा मामला मोतिहारीं शहर के छतौनी थाना क्षेत्र के बरियारपुर चीनी मिल के पास की है ।@BiharPoliceCGRC@RJDforIndia pic.twitter.com/PosP4Npd8v— Asmeet sinha (@AsmeetonGround) August 10, 2025
पुलिस प्रशासन की तत्काल कार्रवाई
मामला सामने आते ही मोतिहारी के एसपी स्वर्ण प्रभात ने दारोगा अनुज कुमार को निलंबित कर दिया और सदर एसडीपीओ को मामले की जांच का आदेश दिया। हालांकि, पुलिस ने महिला का बयान भी रिकॉर्ड किया है, जिसमें उसने पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई शिकायत नहीं की है। प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और पूरी जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
घटना के बाद स्थानीय लोग पुलिस के इस रवैये की कड़ी निंदा कर रहे हैं। उनका कहना है कि पुलिस का काम जनता की सुरक्षा करना है, न कि उनका उत्पीड़न। लोगों ने अधिकारियों से मांग की है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कठोर कदम उठाए जाएं और पुलिस कर्मियों को अपनी जिम्मेदारियों का सम्मान करना सिखाया जाए।
निष्कर्ष: पुलिस व्यवस्था पर उठे सवाल
यह शर्मनाक घटना बिहार पुलिस की छवि को धूमिल करती है और कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न चिन्ह लगाती है। उम्मीद की जानी चाहिए कि विभागीय जांच निष्पक्ष होगी और दोषी पुलिसकर्मियों को कड़ी सजा दी जाएगी, ताकि जनता का पुलिस प्रशासन पर विश्वास बना रहे।



