सुरों की मलिका आशा भोंसले नहीं रहीं, 92 की उम्र में ली अंतिम सांस

संगीत जगत को बड़ा झटका, 92 की उम्र में आशा भोंसले का निधन राजकीय सम्मान के साथ शिवाजी पार्क में हुआ अंतिम संस्कार दिग्गज कलाकारों ने गीतों के जरिए दी भावभीनी विदाई

Asha bhosle: भारतीय संगीत जगत को गहरा झटका देते हुए दिग्गज गायिका Asha Bhosle का रविवार को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके जाने से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। सोमवार को मुंबई के ऐतिहासिक Shivaji Park में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। ‘आशा ताई अमर रहें’ के नारों के बीच उनके बेटे आनंद ने उन्हें मुखाग्नि दी। यह पल हर किसी के लिए बेहद भावुक रहा।

गीतों के साथ दी गई अंतिम विदाई

आशा ताई का अंतिम सफर भी उनके जीवन की तरह सुरों से भरा रहा। अंतिम संस्कार के दौरान Shaan और Anup Jalota समेत कई कलाकारों ने उनके ही मशहूर गीत गाकर श्रद्धांजलि दी। माहौल ऐसा था जहां एक ओर आंखें नम थीं, तो दूसरी ओर उनके संगीत के प्रति सम्मान साफ झलक रहा था।

Asha bhosle: अस्पताल में चल रहा था इलाज

पिछले कुछ समय से आशा भोंसले की तबीयत ठीक नहीं थी। सांस लेने में दिक्कत के चलते उन्हें 11 अप्रैल को Breach Candy Hospital में भर्ती कराया गया था। हालत बिगड़ने पर उन्हें आईसीयू में रखा गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। डॉक्टरों के मुताबिक, उनकी मौत मल्टी-ऑर्गन फेलियर की वजह से हुई।

Asha bhosle: सितारों ने नम आंखों से दी श्रद्धांजलि

अंतिम दर्शन के लिए फिल्म, खेल और राजनीति जगत की कई बड़ी हस्तियां पहुंचीं। A. R. Rahman, Shabana Azmi, Ranveer Singh, Tabu, Jackie Shroff, Farhan Akhtar, Sachin Tendulkar, Mohammed Siraj और Vicky Kaushal समेत कई हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। वहीं, Devendra Fadnavis भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

संघर्ष से शिखर तक का सफर

आशा भोंसले का जीवन संघर्ष और मेहनत की मिसाल रहा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अपनी बहन Lata Mangeshkar के साथ की थी। शुरुआती दौर में उन्हें ज्यादा पहचान नहीं मिली, लेकिन 16 साल की उम्र में फिल्म ‘रात की रानी’ के गाने से उन्हें पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और हिंदी, मराठी, बंगाली समेत कई भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गाने गाए।

हमेशा जिंदा रहेंगे उनके सुर

Asha bhosle: आशा भोंसले भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गीत और उनकी आवाज हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे। उनका जाना भारतीय संगीत के एक स्वर्णिम अध्याय के खत्म होने जैसा है।

 

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