Akhilesh Yadav का FB पेज Active, वजह भी आई सामने.. 85 लाख फॉलोअर्स, लेकिन खुद बस 2 को करते हैं फॉलो!

समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का आधिकारिक फेसबुक अकाउंट शुक्रवार शाम अचानक ब्लॉक हो गया। उनके इस पेज पर लाखों फॉलोअर्स हैं और यह सपा की डिजिटल राजनीति का प्रमुख प्लेटफॉर्म माना जाता है।
पार्टी नेताओं ने इस कार्रवाई को भाजपा सरकार की “राजनीतिक साजिश” बताया, जबकि मेटा (फेसबुक की पैरेंट कंपनी) ने कहा कि यह कदम प्लेटफॉर्म की पॉलिसी उल्लंघन के चलते उठाया गया।
12 घंटे बाद फेसबुक पेज हुआ बहाल
करीब 12 घंटे के सस्पेंशन के बाद अखिलेश यादव का पेज शनिवार सुबह फिर से बहाल कर दिया गया।
सूत्रों के मुताबिक, मेटा की टीम ने पेज की गतिविधियों की जांच के बाद पाया कि पोस्ट्स को लेकर कुछ “पॉलिसी-संबंधी गड़बड़ी” थी, जिसे सुधारने के बाद एक्सेस दोबारा दिया गया।
हालांकि, फेसबुक ने इस मामले में कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान नहीं दिया।
सपा का आरोप — “यह लोकतंत्र और अभिव्यक्ति पर हमला”
सपा प्रवक्ताओं ने तीखा हमला बोलते हुए कहा,
“देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी के नेता का पेज बिना किसी नोटिस या चेतावनी के ब्लॉक करना, लोकतंत्र की आवाज़ को दबाने की कोशिश है।”
पार्टी ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई और सरकार सोशल मीडिया का इस्तेमाल विपक्षी आवाज़ों को सीमित करने के लिए कर रही है।
सरकार और मेटा ने क्या कहा?
सरकारी सूत्रों और मेटा की ओर से यह साफ किया गया कि अकाउंट ब्लॉक करने में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं था।
मेटा की प्रवक्ता के अनुसार, “यह पूरी तरह से कंपनी की आंतरिक नीति के तहत की गई तकनीकी कार्रवाई थी, जिसे जांच के बाद वापस ले लिया गया।”
दिलचस्प फैक्ट — 85 लाख फॉलोअर्स, लेकिन सिर्फ दो लोगों को करते हैं फॉलो
अखिलेश यादव सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय नेताओं में गिने जाते हैं। उनके फेसबुक पर करीब 85 लाख (8.5 मिलियन) से ज़्यादा फॉलोअर्स हैं, जो किसी भी क्षेत्रीय नेता के लिए बड़ी संख्या मानी जाती है।
लेकिन दिलचस्प बात यह है कि अखिलेश यादव खुद केवल दो अकाउंट्स को फॉलो करते हैं — एक है ट्विटर (अब X) कंपनी का आधिकारिक पेज, और दूसरा है उनकी पत्नी व कन्नौज सांसद डिंपल यादव का पेज।
यह बात सोशल मीडिया यूज़र्स के बीच अकसर चर्चा का विषय रहती है और लोग इसे उनके “सीमित लेकिन सटीक” डिजिटल नेटवर्किंग स्टाइल का उदाहरण बताते हैं।

अखिलेश यादव का जवाब
अकाउंट बहाल होने के बाद अखिलेश यादव ने X (ट्विटर) पर लिखा —
“आवाज़ को दबाने की कोशिश की जाती है, लेकिन सच्चाई कभी नहीं रुकती। समाजवादी विचारधारा हमेशा जनता के बीच जिंदा रहेगी।”
उनके इस बयान को सपा समर्थकों ने सोशल मीडिया पर जोरदार समर्थन दिया, जिससे #AkhileshYadav और #FacebookBlock जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।
डिजिटल प्लेटफॉर्म अब राजनीतिक मैदान का विस्तार
अखिलेश यादव का फेसबुक ब्लॉक और बहाली विवाद यह दिखाता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म अब राजनीतिक मैदान का विस्तार बन चुके हैं।
जहां एक ओर सोशल मीडिया कंपनियों को अपनी पॉलिसियों पर पारदर्शिता रखनी होगी, वहीं राजनीतिक दलों को भी इन मंचों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना होगा — ताकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून, दोनों का संतुलन बना रहे।



