AI भविष्य की लड़ाइयों को बदल देगा

रायसीना डायलॉग 2026 में सीडीएस अनिल चौहान ने डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य पर खुलकर बात की। वैज्ञानिक विवेक लाल ने बताया कि न्यूक्लियर रिएक्टर कम जगह में ज्यादा पावर पैदा कर सकते हैं।

CDS अनिल चौहान: रायसीना डायलॉग 2026 में सीडीएस अनिल चौहान ने डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में AI युद्धों को पूरी तरह से बदल देगा और इसके लिए डिफेंस सेक्टर को अत्यधिक पावर, ऑटोनॉमी और एनर्जी की जरूरत होगी। अनिल चौहान ने बताया कि भारत छोटे-छोटे कदम उठा रहा है ताकि डिफेंस सेक्टर के लिए डेडिकेटेड AI सिस्टम तैयार किया जा सके। उन्होंने अमेरिका-इजरायल और ईरान के हालिया संघर्षों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन लड़ाइयों में AI की भूमिका बेहद अहम रही है। पहले युद्ध टैंकों, एयरक्राफ्ट और जहाजों पर आधारित थे, लेकिन अब डेटा, नेटवर्क और इंटेलिजेंस भी निर्णायक बन गए हैं।

CDS अनिल चौहान: ऊर्जा का स्वतंत्र स्रोत जरूरी

फिलीपींस के जनरल रोमियो एस ब्रॉनर जूनियर ने अपनी सेना के लिए इंडिपेंडेंट एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव और हाल के अमेरिकी हमलों के अनुभव ने साबित कर दिया है कि एनर्जी कटौती अक्सर पहला कदम होता है, इसलिए स्वतंत्र ऊर्जा स्रोत होना बहुत जरूरी है। फिलीपींस ने इसके लिए तीन मुख्य पहल शुरू की हैं: 1. AI प्रोग्राम, 2. नेशनल न्यूक्लियर एनर्जी सेफ्टी एक्ट, जिससे द्वीपों पर छोटे न्यूक्लियर प्लांट लगाए जा सकें, 3. 500 मेगावाट का डेटा सेंटर, जिसमें 1000 सर्वर होंगे, AI डेवलपमेंट और ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लिए।

न्यूक्लियर रिएक्टर और स्टेबल पावर

CDS अनिल चौहान: वैज्ञानिक विवेक लाल ने बताया कि न्यूक्लियर रिएक्टर कम जगह में ज्यादा पावर पैदा कर सकते हैं। ये AI और डेटा सिस्टम के लिए स्टेबल पावर सप्लाई देते हैं और जरूरत के हिसाब से आउटपुट बढ़ा या घटा सकते हैं। इसके साथ ही, फोर्टस्क्यू कैपिटल की दिव्यता आशिया ने कहा कि आज डेटा लोकेशन और प्रोसेसिंग पर संवेदनशीलता बढ़ रही है। जब डेटा कई सेंटर्स पर प्रोसेस होता है, तो इसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। इस कमजोरी पर अभी भी काम चल रहा है।

 

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