एक ही सवाल: VIP उड़ानें, वही विमान कंपनियां और बार-बार होने वाले घातक हादसे
Ajit Pawar के विमान हादसे ने एक बार फिर VIP हवाई यात्राओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत में अब तक कई बड़े नेताओं की मौत हेलीकॉप्टर और पर्सनल प्लेन क्रैश में हो चुकी है। हैरानी की बात यह है कि इन हादसों में शामिल विमान और हेलीकॉप्टर अक्सर उन्हीं कंपनियों के रहे हैं, जिनसे भारत लगातार खरीद करता आया है।

Plane crash: महाराष्ट्र की राजनीति आज एक ऐसे सवाल के साये में खड़ी है, जो सिर्फ एक हादसे तक सीमित नहीं है। बारामती में लैंडिंग के दौरान हुए विमान हादसे में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन ने पूरे देश को झकझोर दिया है। यह कोई पहला मौका नहीं है जब कोई बड़ा नेता हेलीकॉप्टर या पर्सनल प्लेन हादसे का शिकार हुआ हो। बीते दशकों में भारत ने कई शीर्ष नेताओं को ऐसे ही हादसों में खोया है। हैरानी की बात यह है कि इन हादसों में इस्तेमाल हुए विमान और हेलीकॉप्टर अक्सर उन्हीं चुनिंदा कंपनियों के रहे हैं, जिनसे भारत लगातार खरीद करता आया है। ऐसे में सवाल उठना लाज़मी है, आख़िर इन हादसों के पीछे वजह क्या है?
Ajit Pawar विमान हादसा: क्या हुआ बारामती में
बुधवार सुबह महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार मुंबई से बारामती के लिए एक प्राइवेट चार्टर्ड विमान से रवाना हुए थे। लैंडिंग के वक्त उनका विमान रनवे के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में कुल पांच लोग सवार थे और हादसे में सभी की मौत हो गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक यह एक पर्सनल जेट था, जिसे वीआईपी मूवमेंट के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। हादसे के कारणों की जांच DGCA और अन्य एजेंसियां कर रही हैं, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर वीआईपी हवाई यात्रा की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
जब-जब नेताओं की जान गई आसमान में
भारत के इतिहास में यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़े नेता की मौत हवाई हादसे में हुई हो। 2009 में आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी की मौत हेलीकॉप्टर क्रैश में हुई थी। 2002 में लोकसभा स्पीकर जी.एम.सी. बालयोगी का हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार हुआ। 2021 में देश के पहले CDS जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और अन्य अधिकारी Mi-17 हेलीकॉप्टर क्रैश में शहीद हो गए।इन सभी हादसों में एक समानता दिखती है—वीआईपी मूवमेंट, खराब मौसम या तकनीकी कारण और जांच के बाद भी अधूरे जवाब।
कौन-कौन सी कंपनियों के विमान और हेलीकॉप्टर रहे शामिल
अगर इन हादसों की लिस्ट पर नजर डालें तो ज़्यादातर मामलों में कुछ गिनी-चुनी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के विमान और हेलीकॉप्टर सामने आते हैं। प्राइवेट जेट से जुड़े मामलों में Bombardier के Learjet जैसे विमान कई बार चर्चा में आए हैं। वहीं हेलीकॉप्टर हादसों में Bell, Mi-Series (रूस निर्मित) और सरकारी ऑपरेटर पवन हंस के हेलीकॉप्टर शामिल रहे हैं। ये वही कंपनियां हैं जिनसे भारत सालों से सैन्य, वीआईपी और सरकारी उड़ानों के लिए खरीद करता आया है।
भारत बार-बार इन्हीं कंपनियों से खरीद क्यों करता है
इस सवाल का जवाब सिर्फ “हादसे” में नहीं बल्कि सिस्टम में छिपा है। भारत जिन कंपनियों से विमान और हेलीकॉप्टर खरीदता है, वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्टिफाइड और ग्लोबल एविएशन स्टैंडर्ड्स पर खरी उतरती हैं। इनके पास स्पेयर पार्ट्स, मेंटेनेंस नेटवर्क और लंबा ऑपरेशनल अनुभव होता है। समस्या अक्सर विमान से ज्यादा उसके ऑपरेशन, मौसम, मानवीय चूक और मेंटेनेंस सिस्टम में सामने आती है। लेकिन हर बड़े हादसे के बाद भी खरीद नीति और वीआईपी उड़ानों की सुरक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार नजर नहीं आते।
सवाल जो अब भी अनुत्तरित हैं
अजित पवार के विमान हादसे के बाद एक बार फिर वही सवाल उठ रहे हैं: क्या वीआईपी मूवमेंट के लिए इस्तेमाल हो रहे पर्सनल जेट और हेलीकॉप्टर वाकई सुरक्षित हैं? क्या एक ही तरह के प्लेटफॉर्म पर बार-बार हादसे होना सिर्फ इत्तेफाक है?और क्या हर हादसे के बाद जांच रिपोर्टें सिर्फ फाइलों तक सिमट कर रह जाती हैं? आज अजित पवार नहीं रहे, लेकिन उनका हादसा एक चेतावनी बनकर सामने है। सवाल यह नहीं है कि हादसा कैसे हुआ, असली सवाल यह है कि अगला हादसा रोकने के लिए सिस्टम क्या बदलने वाला है।



