कागज नहीं दिखाना होगा, बिहार से सीख लेकर 12 राज्यों में SIR 2.0 की नई प्रक्रिया शुरू
SIR 2.0 के तहत 12 राज्यों में मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण होगा, जिसमें अब कागज दिखाने की आवश्यकता नहीं होगी। बिहार मॉडल पर आधारित नई प्रक्रिया 4 नवंबर से शुरू होकर 7 फरवरी को समाप्त होगी।

नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने सोमवार को Systematic Intensive Revision (SIR) के दूसरे चरण की तारीखों की घोषणा कर दी है। इस बार मतदाताओं को कागज दिखाने की जरूरत नहीं होगी। आयोग ने बिहार के अनुभव से सीख लेते हुए Enumeration Form की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब फॉर्म भरने के बाद अगर एक महीने के भीतर मतदाता का नाम पुरानी और नई मतदाता सूची में नहीं मिलता, तभी 12 दस्तावेजों की सूची में से एक प्रमाण देना होगा।
पहचान की प्रक्रिया और मैपिंग
चुनाव आयोग के मुताबिक, करीब 60-70% मतदाताओं की पहचान पहले ही पुरानी और नई सूची के मैपिंग से कर ली गई है। मतदाता अपना नाम चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाकर खुद भी चेक कर सकते हैं। सिर्फ उन्हीं लोगों को दस्तावेज़ जमा करने होंगे, जिनका नाम या उनके माता–पिता का नाम पुरानी सूची में नहीं है।
बिहार मॉडल से क्या सीखा गया
इस बार बिहार से मिली सीख के आधार पर कई सुधार किए गए हैं। अब आधार कार्ड को दस्तावेज़ों की सूची में जोड़ा गया है और एक स्कैनिंग ऑप्शन भी दिया गया है। आयोग के मुताबिक, पिछले चरण में “deduplication” यानी एक ही व्यक्ति का नाम दो सूचियों में आने की समस्या थी, जो अब दूर कर दी गई है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि एक व्यक्ति सिर्फ एक ही जगह से Enumeration Form भरे, वरना कार्रवाई की जा सकती है।
असम को क्यों रखा गया अलग
असम में SIR प्रक्रिया फिलहाल लागू नहीं होगी। वहां NRC और नागरिकता अधिनियम के कारण विशेष प्रावधान हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि असम के लिए अलग से आदेश और तारीख की घोषणा की जाएगी। उन्होंने कहा, “नागरिकता अधिनियम के तहत असम में जांच का काम सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में लगभग पूरा हो चुका है, इसलिए SIR-2.0 वहां लागू नहीं होगा।”
समयसीमा और शामिल राज्य
SIR का दूसरा चरण 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक चलेगा। 9 दिसंबर को मसौदा मतदाता सूची जारी होगी और 7 फरवरी को अंतिम सूची प्रकाशित की जाएगी। इस चरण में 12 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल होंगे और करीब 51 करोड़ मतदाता पुनरीक्षण के दायरे में आएंगे। आयोग का उद्देश्य है कि कोई भी योग्य मतदाता छूटे नहीं और कोई अयोग्य नाम सूची में न रहे।
बंगाल पर स्थिति स्पष्ट
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार के साथ किसी भी तरह का टकराव नहीं है। तृणमूल कांग्रेस द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर उन्होंने कहा कि “आयोग संवैधानिक दायरे में अपना कार्य कर रहा है, और राज्य सरकारें भी अपने संवैधानिक दायित्व निभाएंगी।”
पुराने SIR का संदर्भ और कट–ऑफ डेट
आयोग ने राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ दो बैठकें कर रूपरेखा तय की है। अधिकांश राज्यों में पिछला गहन पुनरीक्षण 2002 से 2004 के बीच हुआ था, जो अब ‘कट–ऑफ डेट’ का काम करेगा। दिल्ली में 2008 और उत्तराखंड में 2006 का SIR आखिरी बार हुआ था।



