RJD की पहली लिस्ट में 52 उम्मीदवार, तेजस्वी फिर राघोपुर से मैदान में
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के नामांकन खत्म होने के दो दिन बाद आरजेडी ने अपनी पहली आधिकारिक लिस्ट जारी की है। इसमें उन 52 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं जिन्होंने पहले ही नामांकन कर दिया है। वैशाली जिले की चर्चित राघोपुर सीट से आरजेडी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव चुनाव लड़ रहे हैं।

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के नामांकन खत्म होने के दो दिन बाद आरजेडी ने अपनी पहली आधिकारिक लिस्ट जारी की है। इसमें उन 52 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं जिन्होंने पहले ही नामांकन कर दिया है। वैशाली जिले की चर्चित राघोपुर सीट से आरजेडी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव चुनाव लड़ रहे हैं।
यादव और मुस्लिम कैंडिडेट्स को तरजीह
आरजेडी की इस लिस्ट में सामाजिक समीकरण को साधने की स्पष्ट कोशिश दिखाई दे रही है। 52 उम्मीदवारों में 22 यादव, 3 मुस्लिम, 2 भूमिहार और 1 ब्राह्मण प्रत्याशी को टिकट दिया गया है। राघोपुर सीट पर तेजस्वी यादव का मुकाबला बीजेपी प्रत्याशी सतीश यादव से होगा। सतीश यादव वही नेता हैं जिन्होंने 2010 के चुनाव में राबड़ी देवी को इसी सीट से हराया था। इस बार मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है।
महागठबंधन में सीटों को लेकर तनातनी
पहले चरण के नामांकन के साथ ही महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर विवाद और गहराता जा रहा है। आरजेडी–लेफ्ट पार्टियों ने कांग्रेस की 10 से अधिक सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं, जिससे कांग्रेस खेमे में नाराजगी बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू और तेजस्वी यादव के बीच बातचीत लगभग ठप हो गई है, जिससे गठबंधन में तनाव और बढ़ गया है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने तोड़ा गठबंधन
तनाव के इस माहौल में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने भी महागठबंधन से अलग होने का ऐलान कर दिया है। JMM अब बिहार में अपनी स्वतंत्र उपस्थिति दर्ज कराने की रणनीति पर चल रहा है। पार्टी ने छह सीटों — धमदाहा, चकाई, कटोरिया, मनिहारी, जमुई और पीरपैंती — पर अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। यह फैसला महागठबंधन के लिए झटका माना जा रहा है, क्योंकि झारखंड में आरजेडी और जेएमएम पहले साथ मिलकर चुनाव लड़ चुके हैं।
राजनीतिक समीकरण में बढ़ी हलचल
आरजेडी की पहली लिस्ट और गठबंधन की अंदरूनी खींचतान ने बिहार चुनावी राजनीति में नई हलचल मचा दी है। जहां आरजेडी अपने कोर वोटबैंक पर भरोसा कर रही है, वहीं कांग्रेस और सहयोगी दलों में सीटों को लेकर असंतोष खुलकर सामने आ गया है।



